नमामि गंगे के पहले चरण में गंगोत्री घाट को नहीं मिली जगह

उत्तरकाशी, नमामि गंगे योजना के पहले चरण में गंगोत्री में घाट निर्माण के प्रस्ताव को जगह नहीं मिल पाई। वेबकॉस नामक कंपनी की डीपीआर को केंद्र सरकार ने व्यावहारिक और वित्तीय कारणों का हवाला देकर लौटा दिया। अब यह जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। इसी महीने की आठ तारीख तक उसे प्रस्ताव केंद्र को भेजना है।

इधर, उत्तरकाशी जिले में बदहाल पड़े आठ घाटों के जीर्णोद्धार की कवायद शुरू होने जा रही है। इसके लिए ङ्क्षसचाई विभाग को करीब 15 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल गई है।

नमामि गंगे योजना के तहत फिलहाल ङ्क्षसचाई विभाग को जिले में हीना घाट, केदारघाट, जड़भरत घाट, मणिकर्णिका घाट, नागेश्वर घाट व डुंडा घाट के पुनर्निर्माण की स्वीकृति मिली है। इसके लिए संबंधित विभाग ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

गंगोत्रीधाम जैसे महत्वपूर्ण एवं अतिसंवेदनशील घाट को इन योजनाओं के साथ स्वीकृति नहीं मिल पाई। इस घाट के निर्माण के लिए वेबकॉस कंपनी ने तकरीबन साढ़े आठ करोड़ रुपये की डीपीआर केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को भेजी थी, लेकिन मंत्रालय ने इसे लौटा दिया।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पीएस पंवार बताते हैं कि धाम में भागीरथी नदी के तेज बहाव जैसे व्यावहारिक एवं वित्तीय कारणों से केंद्रीय मंत्रालय ने इसे मंजूरी नहीं दी। अब इसके निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को मिली है।

उन्होंने बताया कि योजना से जुड़े अधिकारियों से बातचीत कर दोबारा घाट निर्माण का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा रहा है। जैसे ही केंद्र से हरी झंडी मिलेगी, घाट का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गंगोत्री धाम आने वाले सर्वाधिक यात्री व पर्यटक यहां स्नान करने के बाद मां गंगा के दर्शन करते हैं, लेकिन घाट के बदहाल पड़े होने के कारण स्नानार्थियों को भारी जोखिम उठाकर यहां स्नान करना पड़ता है।

उधर, नमामि गंगे उत्तराखंड के नोडल अधिकारी डॉ. राघव लंगर का कहना है कि नमामि गंगे परियोजना में गोमुख से हरिद्वार तक 35 घाट स्वीकृत हैं। पहले चरण में 20 घाटों को प्राथमिकता दी गई है। शेष 15 घाट अगले चरण में बनाए जाएंगे।

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