1.48 लाख करोड़ के बजट में 30 हजार करोड़ खर्च नहीं कर सकी बिहार सरकार

पटना.महालेखाकार ने बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले वर्ष के बजट का हवाला देकर यह बताया गया है कि राज्य सरकार अपने बजट का सही आकलन नहीं कर पाती है। नतीजा 1.48 लाख करोड़ रुपए के बजट में से 35 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके। हद तो यह है कि 31 मार्च 2016 को 15913 करोड़ रुपए सरेंडर हुए जबकि 10557 करोड़ रुपए लैप्स हो गए।
सोमवार को वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने राज्य का वित्त, सामान्य, सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र, राजस्व क्षेत्र और सार्वजनिक उपक्रमों पर सीएजी की रिर्पोट को विधानसभा में पेश किया। अब लोक लेखा समिति इसका अध्ययन करके सरकार को कार्रवाई के लिए अपने सुझाव देगी।
दूसरी ओर महालेखाकार लेखा परीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि गड़बड़ियों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना है। उन्होंने कहा कि बिहार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आए हैं लेकिन एसी-डीसी बिल के समायोजन और उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिलने का सिललिसा रुका नहीं है। बेवजह खर्चों और विकास योजनाओं की धीमी रफ्तार का ध्यान रखते हुए सरकार को वित्तीय प्रबंधन को दुरुस्त करने की सलाह दी गई है।
सरकार को सुझाव
– वास्तविक बजट प्राक्कलन तैयार करें।
– वित्तीय प्रबंधन में सुधार की जरूरत।
– बजट मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएं।
– विभागों में मजबूत आंतरिक नियंत्रण प्रणाली।
– गबन के मामलों को वसूली-बट्टे खाते में डालें।
– पृथक लेखा परीक्षा रिपोर्ट समय पर विधानमंडल में पेश करें।
– बिहार वित्तीय नियमावली का पालन करें।
– बजट दस्तावेज में प्राप्तियों के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास हो।
– सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र को अधिक प्राथमिकता दें।
– अकाउंट और निगरानी प्रणाली लागू की जाए।

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