7 निश्चय के ‘हर गली पक्की नाली’ ‘हर घर नल का जल’ के लिए गठित समिति अवैध

पटना.पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को अपने महत्वपूर्ण फैसले में, सात निश्चय की दो बड़ी योजनाओं-’हर घर नल जल’ और ‘हर गली और नाली पक्की’ को लागू करने लिए गठित वार्ड विकास समिति को असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले का मुख्य आधार रहा-बिहार सरकार द्वारा पंचायती राज प्रणाली की वित्तीय शक्ति एवं अधिकारों का अतिक्रमण किया जाना।
इस फैसले से करीब 8300 मुखिया को उनके पंचायतों में आर्थिक सामाजिक योजनाओं को लागू करने का वित्तीय अधिकार वापस मिल गया। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सारण जिला मुखिया संघ व अन्य की रिट याचिकाओं को सुनते हुए बिहार सरकार पंचायती राज विभाग की उन दो अधिसूचनाओं को भी निरस्त कर दिया, जिसके जरिए सरकार ने वार्ड विकास समिति का गठन किया था। हालांकि, इस फैसले से सात निश्चय की योजनाओं में होने वाले खर्च पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या था मामला :सूबे के समग्र आर्थिक विकास के लिए सात निश्चय की योजनाओं में से हर घर नल का जल एवं हर गली नाली पक्की के कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार ने दिशा निर्देश के तौर पर दो अधिसूचनाएं क्रमशः 23 सितम्बर 2016 और 25अक्टूबर 2016 को जारी की। इसके आलोक में राज्य सरकार ने वार्ड विकास समितियों को गठित किया। इसके जरिए केंद्रीय वित्त आयोग से पंचायती राज योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि का 80 फीसदी खर्च होना था। मुखिया संघ को इस सरकारी फैसले पर घोर आपत्ति थी।
संविधान से पंचायती राज व्यवस्था को मिले वित्तीय अधिकार के तहत पंचायतों की योजनाओं के लिए मुखिया और प्रमुखों को जो राशि सरकार से सीधे मिलती थी, वह वार्ड विकास समितियों को मिलने लगी थी। मुखिया संघ ने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया था। सरकार के फैसले के खिलाफ संघ, हाईकोर्ट आया था।

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