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1857 में कानून का ड्राफ्ट तैयार करना शुरू किया और 1860 में कानून लागू किया। उस कानून को इंडियन पीनल कोड कहते है और 1861 में पुलिस एक्ट बना था।

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राजस्थान: अंग्रेजों के जमाने के 222 कानून देश को नहीं बढ़ने दे रहे आगे, नया कानून बनाए भारत सरकार- अश्विनी उपाध्याय
BJP नेता अश्विनी उपाध्याय।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को सर्व समाज हिंदू महासभा की ओर अंग्रेजों के जमाने में बने 222 कानूनों का बहिष्कार के लिये सेमिनार का अयोजन किया गया।

इसके साथ ही इन कानूनों के खिलाफ आठ अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। बीजेपी दिल्ली के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय इस पूरे आंदोलन की अगुवाई करेंगे। उपाध्याय ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में जो कानून बनाये गये हैं, उनको खत्म करने के लिए हम जनता के साथ सभी कानून के प्रतियों की होली जलाएंगे।

जयपुर में अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जिस प्रकार महात्मा गांधी ने 1942 में भारत छोड़ो का नारा जनता को दिया था वैसे ही हम काले अंग्रेजी कानूनों को भारत छोड़ो का नारा दे रहे हैं। अंग्रेजों को गए कई साल बीत गये हैं लेकिन आज भी हम पर जबरन ये कानून लागू हैं। जबकि इन सभी कानून के चलते भारत के टुकड़े हो रहे हैं। भारत में न नक्सलवाद बंद हो रहा है ना माओवाद ना ही कट्टरवाद। इन कानूनों के कारण ही देश में कई घोटाला करने वाले खुले आम घूम रहे हैं।

अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेजों व सत्ता की गुलाम पुलिस।

उपाध्याय ने कहा, “मंगल पांडेय की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने मैकाले को बोला कानून बनाओ और कानून ऐसा बनाओ जिससे हम कानून के जरिए ही यहां के लोगों को बंधक बना लें।

मैकाले ने 1857 में कानून का ड्राफ्ट तैयार करना शुरू किया और 1860 में कानून लागू किया। उस कानून को इंडियन पीनल कोड कहते है और 1861 में पुलिस एक्ट बना था। पुलिस एक्ट ऐसा है कि पुलिस हमेशा सत्ता की गुलाम बनकर रहेगी। जो पुलिस पहले अंग्रेजों की गुलाम थी वह आज सत्ता की गुलाम है।”

अश्विनी उपाध्याय ने आगे कहा, “अंग्रजों के बनाए इस घटिया काले कानूनों की बदौलत ही पश्चिम बंगाल में लोगों पर अत्याचर होता रहा। कश्मीर में 1990 में जो पलायन हुआ वो रात के धंधरे में नहीं बल्कि दिन के उजाले पुलिस की मौजूदगी में हुआ था। उस दिन कश्मीर में हत्याएं होती रहीं, लोगों के घर जलाए गए लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। इसी कानून का नतीजा है कि कश्मीर में अलगाववादी लाउडस्पीकर से आवाज दे रहे थे, कि कश्मीर छोड़ो, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। यदि पुलिस ने उस समय कार्रवाई की होती तो कश्मीर से पलायन नहीं होता।”

भारत सरकार को बनाना चाहिए नया कानून।

उपाध्याय आगे कहते हैं कि इस अंग्रेजी कानून के चलते आम जनता परेशान है और भारत में आज भी मुकदमों में फैसला आने में सालों लग जाते है। भारत में भी फ्रांस, अमेरकिा और सिंगापुर की तरह कानून होना चाहिए, जिसमें फैसले जल्द हों। कानून अगर कठोर होगा तो मुनाफाखोरी, रिश्वतखोरी के साथ समाज की कई बुराईयां खत्म हो जाएंगी।” उन्होंने कहा, “भारत सरकार को अमेरिका व फ्रांस के कानून अध्ययन करके नया कानून बनाना चाहिए।”

ये हैं अंग्रेजों के जमाने के कानून

  • 1836- बंगाल डिस्ट्रिक्ट एक्ट।

  • 1844- सेंट्रल एक्साइज एक्ट।

  • 1850- पब्लिक सर्वेंट (इंक्वायरीज) एक्ट।

  • 1860- इंडियन पीनल कोड।

  • 1861- पुलिस एक्ट।

  • 1869- डिवोर्स एक्ट।

  • 1872- एविडेंस एक्ट।

  • 1882- ट्रांसफर ऑफ प्रोपर्टी एक्ट।

  • 1874- मैरिड वीमन प्रोपर्टी एक्ट।

  • 1880- रिलीजियस प्रोपर्टी एक्ट।

  • 1922— दिल्ली यूनिवसर्टी एक्ट।

  • इसके अतिरिक्त 211 अन्य कानून

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