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गोण्डा में एससी महिला की लोकेशन, कथित बलात्कारियों की लोकेशन मुंम्बई व धमरैया में, आखिर कैसे लखनऊ में हुआ बलात्कार। हाईकोर्ट में दर्ज याचिका।।

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      भारतीय जनता पार्टी सरकार का दिव्यब्रह्मास्त्र जो कि गैर दलितों को समाप्त करनें व प्रताड़ना का सशक्त माध्यम बनकर निकला है। यह जिस प्रकार नियोजित तरीके से दलितों को प्राप्त यह सुरक्षा कवच गैर दलित समुदाय के अति महत्वाकांक्षी स्वार्थी लोगों का भी सशक्त अस्त्र बनकर उभरा है।

          हम आपके अवलोकनार्थ एक ऐसा ही मामला लायें हैं गोण्डा जनपद के उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र से, जहाँ दलित समुदाय को मिले इस सुरक्षा कवच को एक सामान्य जाति के स्वार्थी व्यक्ति द्वारा अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति व पारिवारिक विवाद की खुन्नस को मिटानें व बेइमानी के लिए किया है।

क्या व क्यों हुआ ऐसा?

जैसा कि ज्ञात हो विगत वर्ष जनपद गोण्डा में एक प्रधान प्रतिनिधि संसाधन सम्पन्न मिश्रा जी नें एक दैनिक मजदूर मिश्रा जी पर व अपनें विरोधी पक्ष जो कि चुनाव लड़े थे व लड़ सकते थे को एससी महिला से बलात्कार व एससी एसटी एक्ट की धाराओं को लगाकर थानें में प्राथमिकी दर्ज करवाई लेकिन सीओ तरबगंज की जाँच में उक्त मुद्दा मनगढ़ंत व कोरी कल्पना मात्र लगा व उन्होंनें केस को बन्द कर दिया ।
लेकिन मिश्रा जी प्रधान प्रतिनिधि की खुन्नस इतनें पर नही शान्त हुई माननीय जी नें हाईकोर्ट में जाकर पुनः अदालती हस्ताक्षेप से मुकदमा पंजीकृत करवाया व पुनः जाँच जारी है।

हमारा अपना सामाजिक अंकेक्षण।

इसी सवर्ण की सवर्ण के प्रति विद्वैश का आलम यह है कि मेरी शुरुआती दौर की पत्रकारिता से आज तक जितनें भी अनुसूचित जाति व जनजाति अधिनियमान्तर्गत, मेरी खोज में जितनें भी केस, जिस किसी भी वर्ग पर लगे हैं, उसमें उसी वर्ग के नियोजन का परिणाम उक्त केस में रहा है।

       वह चाहे हाथरस का बूलगढी़ का मनीषा बाल्मीकि केस रहा हो य स्वर्गीया संगीता रजावत आगरा का केस रहा हो य अमेठी जनपद के बंदोईया के दलित प्रधान का स्वयं पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगानें व गांव के सम्मानित ब्राह्मण परिवार को उक्त अधिनियमान्तर्गत फँसाये जानें का मामला रहा हो हर केस में नियोजन उसी वर्ग के स्वार्थी व मौकापरस्त लोगों द्वारा अमूमन किया गया, जिस वर्ग का व्यक्ति उक्त केस में फँसाया गया था।

ईश्वर की अनुकम्पा से हमारी ज्यादातर रिपोर्टें अक्षरशः सत्य उतरीं।

     जबकि हाथरस केस को जब हमनें 1 अक्टूबर को फलाना दिखाना वेब समाचार पोर्टल पर चलाया तो सबसे पहले भाजपा व अन्य राजनैतिक संगठनों के बेवकूफ भक्त छाप ज्ञानियों नें हमें खूब गालियां दी, ऐसा ही अन्य केसों मे भी हुआ, जबकि हमारी समस्त रिपोर्टें अक्षरशः सत्य पाई गयीं। वहीं हाथरस पर हमारी व टीम की मात्र छः दिन की रिपोर्टिंग भी सीबीआई की छः माह की रिपोर्टिंग के समकक्ष बराबर खरी उतरी।

पूरे मामले पर एक सरसरी नजर।

         जब इस केस की पड़ताल के सिलसिले में आखिरी सच टीम नें जमीनी पड़ताल शुरू की तो काफी दिलचस्प व पेंचीदा मामला सामने आया। दर असल पूरा मामला गांव धमरैया पोस्ट बकसैला थाना उमरी बेगमगंज जिला गोण्डा का है, जिसमें ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पंडित रामदेव मिश्रा जी की पारिवारिक विवाद की खुन्नस निकालने व बेईमानी की नियत व स्वार्थ पूर्ति के लिये बृजेन्द्र मिश्रा पुत्र मथुरा प्रसाद मिश्रा को, व राजनैतिक खुन्नस निकालने के लिये गांव की ही, अमित कुमार रिंकू पाण्डेय को व एक गैर गांव निवासी बृजेन्द्र मिश्रा जी के सहयोगी अरूण शुक्ला को बलात्कार व अनुसूचित जाति जनजाति संरक्षण एक्ट में अन्दर करवानें व अगला चुनाव निष्कंटक होकर जीतनें के लिये नियोजन करते हुए, एक दलित महिला सुनीता पत्नी ओम प्रकाश को निवासी धमरैया को टटिया (आँड़) बनाकर फर्जी केस का जाल बुना, जिसके अन्तर्गत महिला द्वारा यह अभियोग लगाया गया कि बृजेन्द्र मिश्रा की फर्म मुम्बई में है जिसमें मेरे पति नौकरी करते हैं, दिनांक 5 अगस्त 2020 को बृजेन्द्र मिश्रा नें यह बताया कि कल तैयार रहो, मुम्बई चलना है, तुम्हारे पति नें बुलाया है। के क्रम में सुनीता, बृजेन्द्र मिश्रा, पूर्व अविजित प्रधान पद प्रत्याशी के प्रतिनिधि अमित शुक्ला उर्फ रिंकू शुक्ला व अरूण शुक्ला के साथ बोलेरो गाडी़ जो कि अमित शुक्ला की है, से मुंबई जानें के लिये गोण्डा से लखनऊ गये। चारबाग रेलवे स्टेशन पर पहुँचकर बृजेन्द्र नें कहा, गाड़ी छूट गयी है, अब हम कल चलेंगे, व लखनऊ के एक कमरे में ले गये, नौ बजे के बाद मेरे साथ तीनों नें बारी बारी से बलात्कार किया, उक्त समय मेरे साथ मेरे दोनों बेटे साथ थे। जब मेरी तबियत खराब हुई तो इन लोगों द्वारा मुझे 9 अगस्त को गोण्डा लाकर बस स्टैंड पर छोड़कर फरार हो गये। जिसके बाद मुझे रामदेव मिश्रा मिले जो मुझे बस स्टैंड से लेकर गये व मेरे मायके में छोड़कर गये, तबियत सही होनें के उपरांत मैंनें 25 सितम्बर को एफाईआर थाना उमरीबेगमगंज में लिखित दी थी।

क्या कहती है क्षेत्राधिकारी तरबगंज की जांच आख्या?

जिसकी जाँच क्षेत्राधिकारी तरबगंज महाबीर सिंह नें की जिसमें काल डिटेल का अंकेक्षण किया गया व मोबाइल लोकेशन के नाम पर कथित पीड़िता व तीनों दोषियों में से किसी का भी लोकेशन लखनऊ में नहीं मिला जबकि कथित पीड़िता का लोकेशन कथित बलात्कार की घटना वाली दिनांक को गोण्डा रहा व दो कथित दोषियों का लोकेशन मुम्बई व रिंकू का लोकेशन भी कथित बलात्कार पीड़िता महिला सुनीता से दसियों किलो मीटर दूर पाया गया।
स्थानीय निवासियों से जब जमीनी सच्चाई निकाली तो सारा केस ही मन गढ़ंत निकला। जिस पर क्षेत्राधिकारी द्वारा दिनांक 11 नवम्बर 2020 को एफार लगाकर केस बन्द कर दिया गया।
जिसमें केस बन्द करनें का कारण पीड़िता द्वारा कथित तौर पर जो किवदंती बनाई गयी थी, जाँच में क्षेत्राधिकारी के सवालों का कोई भी सार्थक जवाब कथित व प्रधान प्रतिनिधि द्वारा नियोजित स्वघोषित पीड़िता नही दे पाई। जिसके क्रम में क्षेत्राधिकारी श्री सिंह नें उभय पक्षों का 107/116 में कार्यवाही करते हुए थानाध्यक्ष को शान्तिव्यवस्था बनाये रखनें को निर्देशित किया गया था।
वहीं पीड़ित बृजेंद्र के साथ एक काल रिकार्डिंग है जिसे बृजेंद्र द्वारा कथित पीड़िता से बात करते हुए पूँछा जा रहा है कि आखिर मेरा क्या दोष है, व मैंनें क्या गलत किया है तुम्हारे परिवार के साथ जो तुमनें मुझे फर्जी फंसाया है, पर कथित पीड़िता बृजेन्द्र जी से कहती है कि चाचा सब रामदेव नें रचा है, आपनें य किसी नें मेरे साथ कुछ गलत नही किया है।

हाईकोर्ट से पुनः दायर किया याचिका।

      हाईकोर्ट इलाहाबाद की बेंच लखनऊ में स्वघोषित पीड़िता द्वारा याचिका संख्या 5068/21 दिनांकित 23.02.2021 (पूर्व मुअदमा 25.09.2020) दर्ज करवाई गयी, जिसमें अदालती हस्ताक्षेप के बाद दिनांक 09 मार्च 2021 को उमरीबेगमगंज थानें में दर्ज की गयी है। जिसकी केस डायरी की रिपोर्टिंग 10.03.2021 से क्षेत्राधिकारी तरबगंज नें पुनः शुरु किया व जांच व महिला द्वारा कथित अभियोग पुनः निराधार पाया जा रहा है।

(समस्त केस विनय श्रीवास्तव
आखिरी सच के द्वारा फाइल
अध्ययन कर तैयार किया
गया है।)

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