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क्या व कब से नियोजित षणयंत्र है, ट्विन टावर नोएडा का जिन्न।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में सुपरटेक के 40 मंजिला दो ट्विन टावरों के अवैध निर्माण में कथित तौर पर भूमिका को लेकर नोएडा विकास प्राधिकरण के तीन अधिकारियों को रविवार को सस्पेंड कर दिया। एक सरकारी बयान के मुताबिक, इस मामले की जांच कर रहे एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने नोएडा के 26 अधिकारियों को दोषी पाया है, जिनमें से 20 रिटायर हो चुके हैं, दो की मौत हो चुकी है जबकि चार अभी भी सेवारत हैं।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोषी पाए गए चार सेवारत अधिकारियों में से एक को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था। अब तीन अन्य सेवारत अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा रही है। रिटायर हो चुके अधिकारियों के खिलाफ भी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।

विज्ञापन द्वारा राष्ट्रवादी पार्टी ऑफ इंडिया, अयोध्या से शुरू हुई निर्णायक लडा़ई।

गौरतलब है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को नोएडा सेक्टर 93 ए में निर्माणाधीन रियल्टी ग्रुप सुपरटेक की 40 मंजिला दो इमारतों को इमारत निर्माण संबंधी मानदंडों का उल्लंघन करार देते हुए तीन महीने के भीतर इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश जारी किए थे।

उत्तर प्रदेश सरकार के तहत एक औद्योगिक विकास निकाय नोएडा को सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले की जांच के आदेश दिए थे, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया था, जिसके बाद इस मामले की जांच के लिए दो सितंबर को एक एसआईटी का गठन किया गया था।

विज्ञापन द्वारा विनोद ओझा

एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने रविवार को कहा कि उसने निर्देश दिया है कि मामले में शामिल नोएडा के अधिकारियों, चार निदेशकों और सुपरटेक लिमिटेड के दो वास्तुकारों के खिलाफ राज्य सतर्कता आयोग में प्राथमिकी दर्ज की जाए। नोएडा अथॉरिटी की तरफ से सीईओ भी शामिल हुई थीं। सीईओ ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिए गए समय के अंदर ही दोनों टावर तोड़े जाने हैं। इसलिए देरी सही नहीं है। प्लानिंग विभाग ने बिल्डर प्रतिनिधि से यह कहा कि अगले सोमवार को वह एजेंसियों के एक्शन प्लान के साथ प्रजेंटेशन दें।

विज्ञापन द्वारा मनुवादी पार्टी

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन हुई इस बैठक में दो एजेंसियां बिल्डर की तरफ से आई थीं। इन एजेंसियों ने अपना पहले इमारतों के गिराने का अनुभव तो बताया, लेकिन टि्वन टावर के लिए सीबीआरआई की तरफ से एक्शन प्लान मांगा गया वह इनके पास नहीं था। इस पर अथॉरिटी अधिकारियों ने नाराजगी जताई। इसके साथ ही एक्शन प्लान के साथ अगले सोमवार को फिर प्रजेंटेशन देने के लिए कहा गया।
तय समय में तोड़े जाने हैं टावर।

बैठक में नोएडा अथॉरिटी की तरफ से सीईओ भी शामिल हुई थीं। सीईओ ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिए गए समय के अंदर ही दोनों टावर तोड़े जाने हैं। इसलिए देरी सही नहीं है। प्लानिंग विभाग ने बिल्डर प्रतिनिधि से यह कहा कि अगले सोमवार को वह एजेंसियों के एक्शन प्लान के साथ प्रजेंटेशन दें।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को दोनों टावर अवैध करार देने के साथ ही 3 महीने में तोड़ने का आदेश दिया था। अथॉरिटी को अपनी निगरानी में दोनों टावर 30 नवंबर तक गिरवाने हैं।
आसपास की इमारतों का बीमा भी करवाने पर मंथन।
बैठक में एजेंसी को एक्शन प्लान के साथ प्रजेंटेशन सोमवार को देने के लिए कहा गया। एक्शन प्लान में टि्वन टावर की स्ट्रक्चरल डिजाइन पर रिसर्च, मजबूती, आसपास की स्थिति, प्रदूषण रोकने, ट्रैफिक डायवर्जन आदि बिंदुओं पर जानकारी देनी होगी। अधिकारियों ने बताया कि अगर बिल्डर को कुछ भी रिस्क लगता है तो उसे आसपास की इमारत का बीमा करवाया जा सकता है। इसको लेकर भी मंथन हुआ।

क्या है पूरा मामला?      सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट में बने 40 मंजिला दो टॉवर को अवैध करार देते हुए 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने गिराने का आदेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इन 40 मंजिला टॉवर का नक्शा पास करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए अथॉरिटी को आदेश दिया था। इसके बाद से अथॉरिटी में हड़कंप है। सीएम योगी ने 2 सितंबर को इस मामले की जांच एसआईटी से कराने का फैसला लिया। सप्ताह भर में एसआईटी को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी थी। सोमवार से एसआईटी ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। अब देखना यह है एसआईटी की रिपोर्ट के बाद क्या होता है?

फलाना दिखाना के सम्पादक द्वारा दिया गया सम्मान।
हाथरस बूलगढी़ की सच्चाई निकालने के बाद 1 अक्टूबर 2020 को फलाना दिखाना के सम्पादक शुभम शर्मा जी द्वारा मिला सम्मान।

पूर्व आईएएस अधिकारियों तक आ सकती है जांच की आंच।
2004 में सुपरटेक एमराल्ड के लिए प्लॉट का आवंटन हुआ था। इसके बाद 3 बार नक्शे में बदलाव हुआ है, और इसकी मंजूरी बोर्ड बैठक में ली गई थी। नक्शे में बदलाव का फैसला लेने के लिए उन दिनों नक्शा समिति जिम्मेदार होती थी, जिसके प्रस्ताव को बोर्ड में रखकर मंजूरी देने की प्रक्रिया थी। फिलहाल अथॉरिटी की ओर से शासन स्तर को प्लानिंग विभाग और अन्य संबंधित विभागों में पूर्व में कार्यरत जिन 8 लोगों के नाम भेजे गए थे, उनमें से एक भी आला अधिकारी नहीं हैं।

मामले की जांच में यदि शासन अभी के जैसी गंभीरता बनाए रखता है तो जांच की आंच पूर्व में अथॉरिटी में तैनात रहे बड़े अधिकारियों तक आ सकती है क्योंकि बोर्ड बैठक में मंजूर की गई पॉलिसी के बाद ही बिल्डर के नक्शे में तीन बार संशोधन कर उसे एफएआर बेचा गया। 2011 में बिल्डर ने अथॉरिटी को करीब 15 करोड़ रुपये की सरकारी फीस देकर एफएआर खरीदा था।

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2006 में पहली बार नक्शे में बदलाव किया गया उस समय पूर्व आईएएस संजीव सरन अथॉरिटी के सीईओ थे। 2009 में जब दूसरी बार बदलाव किया गया तो पूर्व आईएएस मोहिंदर सिंह अथॉरिटी के सीईओ थे। 2012 में जब तीसरी बार नक्शे में बदलाव कर 40 मंजिला टावर खड़ा करने की मंजूरी दी गई तो उस समय कैप्टन एस के द्विवेदी अथॉरिटी के सीईओ थे।समय के साथ बदलते रहे हैं अन्य एरिया के भी नक्शे।

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पॉलिसी को आधार बनाकर बिल्डर को एफएआर बेचा गया था। डीएनडी के बगल में दिल्ली-6 एरिया में इस समय बड़े-बड़े टावर खड़े हुए हैं, या एरिया 2001 के मास्टर प्लान के अनुसार ग्रीन बेल्ट एरिया के रूप में इंगित है। सेक्टर-15ए के लोगों ने दिल्ली-6 एरिया का लैंड यूज बदलने पर उस समय खासा विरोध किया था लेकिन बोर्ड बैठक में पॉलिसी लाकर इसके लैंडयूज में बदलाव किया गया था।

विज्ञापन द्वारा अजय प्रजापति 7518148156

नोएडा ट्विन टावर मामला… 2009-12 के बीच हुआ फर्जीवाड़ा।

नोएडा के सेक्टर-93ए के एमरॉल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट के ट्विन टावर को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया है। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में प्रकरण की जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिया है। इधर, नोएडा अथॉरिटी की सीईओ रितु माहेश्वरी ने दो एसीईओ की अगुवाई में कमिटी बनाकर जांच शुरू करवा दी।

कमिटी ने प्लानिंग और कार्मिक विभाग से दस्तावेज तलब कर पड़ताल शुरू कर दी है। जांच कमिटी अपनी रिपोर्ट में यह बताएगी कि प्राथमिक जांच में जो फर्जीवाड़ा पाया गया है उसमें बिल्डर पर क्या कार्रवाई हो सकती है। इसके साथ ही नोएडा अथॉरिटी के कौन-कौन से अधिकारी इस फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार माने जा सकते हैं। कमिटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई व विभागीय जांच का फैसला लिया जाएगा। 2009-12 के बीच हुए इस फर्जीवाड़े में 7 अधिकारी रेडार पर थे।

दोनों एसीईओ को पूरे प्रकरण पर जांच का जिम्मा दिया गया है। कोर्ट के आदेश में दिए गए हर एक विंदु पर कार्रवाई होगी। कमिटी अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में यह बताएगी कि जो फर्जीवाड़ा हुआ है उसके लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार कौन अधिकारी या कर्मचारी हैं। जांच को प्राथमिकता पर करवाया जा रहा है।

राष्ट्रवादी शेर
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रितु माहेश्वरी, सीईओ, नोएडा अथॉरिटी

सूत्रों की माने तो कमिटी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट 5-6 दिनों में आ जाएगी। अब तक यह बात तकरीबन सामने आ चुकी है कि प्रॉजेक्ट में जो भी नियमों का उल्लंघन हुआ है वह 2009 से 2012 के बीच में हुआ है। इस दौरान नोएडा अथॉरिटी का चार्ज 3 अध्यक्ष और 9 सीईओ के पास में रहा। इसके साथ ही चीफ आर्किटेक्ट व टाउन प्लानर एक ही रहा। प्लानिंग विभाग में चार मैनेजर रहे।

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सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट के नक्शे में बदलाव प्लानिंग विभाग के मैनेजर की रिपोर्ट पर हुआ। अलग-अलग अधिकारियों ने इस बदलाव का प्रस्ताव तैयार करने से लेकर मंजूरी दी। कमिटी की जांच 26 नवंबर 2009 को पास हुए टावर नंबर-17 के नक्शे और टावर नंबर-16 और 17 को ग्राउंड फ्लोर और 24 मंजिल निर्माण की मंजूरी तक पहुंच गई है।

यहीं पर कई सवाल खड़े हुए हैं। इसके बाद 2 मार्च 2012 को टावर नंबर-16 और 17 का एफआर बढ़ाने की मंजूरी और दोनों टावर का नक्शा ग्राउंड फ्लोर के साथ 40 मंजिल किया जाना जांच के दायरे में है। इस तरह से यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो टावर नंबर-16 और 17 को अवैध करार देकर तोड़ने का आदेश दिया है उनको खड़ा कराने के लिए नोएडा अथॉरिटी में 2009 से 2012 के बीच में नियम कानून ताक पर रखे गए। इसमें 7 अधिकारियों की भूमिका अब तक संदिग्ध है। देखना यह होगा कि जांच कमिटी की रिपोर्ट में कितने अधिकारियों के नाम सामने आते हैं।

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सीईओ के नीचे स्तर के अधिकारी ही कार्रवाई के जद में
प्रकरण की जांच में कई बिंदु सामने आने हैं, लेकिन अब तक यह बातें सामने आ गई हैं कि जिन नक्शों में बदलाव हुआ या मंजूरी दी गई उनके दस्तावेज पर साइन तत्कालीन सीईओ व अध्यक्ष के नीचे के अधिकारियों के हैं। यह तथ्य जांच में अहम होंगे। लेकिन यह साइन किसकी संस्तुति से हुए यह सवाल बना हुआ है। तत्कालीन एक अधिकारी ने बताया कि नक्शा पास होने या बड़े बदलाव की जानकारी सीईओ स्तर तक होती है, लेकिन अधिकारी हैं कि अपनी कलम कहीं फंसाना नहीं चाहते। इसको लेकर अथॉरिटी में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

ऐसे तय हो सकती है फर्जीवाड़े में जिम्मेदारी।
– बिल्डर के दिए गए आवेदन को किस अधिकारी ने सही माना और आगे बढ़ाया।
-आवेदन किस अधिकारी के पास पहुंचा। उस समय ग्रुप हाउसिंग का प्रभारी कौन था जिसने प्लानिंग विभाग में भेजा।
– प्लानिंग विभाग का चीफ आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर (सीएपी) जिसने आवेदन पर अथॉरिटी से मंजूरी दी।
– आवेदन की मंजूरी से पहले प्लानिंग विभाग के वह जिम्मेदार मैनेजर जो मौके पर गए और निरीक्षण रिपोर्ट दी।
-आरडब्ल्यूए की तरफ से नक्शा और संसोधन को लेकर लगाई गई आरटीआई का जवाब क्यों नहीं दिया गया। इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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