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चित्रकूट अवैध खनन को मिली छूट मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र का मामला, आखिर किसके शह पर पल्लवित हो रहा लाल सोनें का अवैध व्यापार, जिम्मेदार मौन, भाजपा है सत्तारूढ़।

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चित्रकूट। जनपद चित्रकूट के राजापुर तहसील अंतर्गत नैनी गुरगौला बालू खदान में एनजीटी मानकों को ताक में रखकर हो रहा भारी अवैध खनन, इन खनन माफियाओं पर खनिज विभाग की विशेष कृपा, खादान से हर रोज सैकड़ों ओवरलोड वाहनों का हो रहा अवैध परिवहन, एक सबसे बड़ी खास बात ये है कि अगर आप खनिज विभाग या आरटीओ पीटीओ संतोष तिवारी को फोन लगाए तो आप का फोन नहीं उठाया जायेगा, बल्कि आपका नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा।



एक ओर जहां प्रदेश की योगी सरकार के द्वारा साफ छवि स्पष्ट सरकार के मंसूबों में स्थानीय खनिज विभाग पानी फिरता नजर आ रहा है, क्योंकि जब कभी मीडिया इन्हें फोन करती है, पहले तो फोन नही उठाया जाता है, य तो मीडिया का फोन ब्लॉक कर दिया जाता है, बल्कि राज्य से साफ हिदायत दी गई है कि संबंधित जिले के अधिकारी कर्मचारी मीडिया के फोनों को तत्काल संज्ञान में लेकर समस्या की बारीकी से विश्लेषण करने के लिए प्रस्तुत रहे।



पर जिला प्रशासन के अधिकारियों में राज्य व केंद्र का लेश मात्र भी डर नहीं दिखलाई पड़ता उल्टा खनिज विभाग से जब मीडिया द्वारा जवाब मांगा जाता है तो विभाग अपनी लाचारी का ही दुखड़ा मीडिया को सुनाने लगता है। मीडिया के लाख फोन करने के बाद भी संबंधित जिले के खनिज अधिकारी फोन रिसीव करना तक जरूरी नहीं समझते।

अब इस समस्या का क्या होगा जब सभी ओवरलोड गाड़ियां खनिज विभाग की सह से ही जनपद में फर्राटा भर्ती नजर आती है क्युकि दिन के उजाले में खनिज विभाग नहीं आता है, तो सिर्फ रात में यह भी उन गाड़ियों के लिए जिनकी इंट्री जमा नहीं होती उनको पकड़ने, तक जरूरी नहीं समझते, दिन में तो इन्हें सारी गाडियां अंदर लोड ही दिखाई देती हैं। ऐसा खुला भ्रष्टाचार आखिर कब तक चलता रहेगा? क्यों जिले के जिम्मेदार इमानदार जिलाधिकारी इस पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रहे? क्या उन्हें भी किसी प्रकार की मजबूरी है? या फिर कोई दबाव जिसके कारण यह इन पर चुप है? यह एक सोचनीय बिंदु है।



इस विधानसभा सीट का इतिहास

मानिकपुर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये सीट पहले चुनाव से लेकर सन 2007 तक अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित रही। इस सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो साल 1952 में कांग्रेस के दर्शन राम इस सीट से पहले विधायक निर्वाचित हुए। 1957, 1962 और 1969 में कांग्रेस की सिया दुलारी, 1967 में जनसंघ के इन्द्र पाल कोल, 1974 में भारतीय जनसंघ के लक्ष्मी प्रसाद वर्मा, 1977 में जनसंघ के रमेश चंद्र कुरील, 1980 और 1985 में कांग्रेस के शिरोमणि भाई इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए।

मानिकपुर विधानसभा सीट से 1989 और 1993 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मन्नू लाल कुरील विधानसभा पहुंचे तो 1996, 2002 और 2007 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दद्दू प्रसाद विधायक बने। 2008 के परिसीमन में ये सीट सामान्य हो गई। मानिकपुर सीट के सामान्य होने के बाद 2012 में हुए पहले चुनाव में बसपा ने चंद्रभान सिंह को उम्मीदवार बनाया और वे जीतकर विधानसभा पहुंचने में भी सफल रहे।



2017 में आरके पटेल विधायक बने थे

मानिकपुर विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आरके पटेल को उम्मीदवार बनाया। चित्रकूट सदर विधानसभा सीट से बसपा के पूर्व विधायक आरके पटेल बीजेपी के टिकट पर मानिकपुर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने आरके पटेल को उम्मीदवार बनाया और वे जीतकर संसद में पहुंच गए। आरके पटेल के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव हुए। उपचुनाव में बीजेपी ने आनंद शुक्ल को उम्मीदवार बनाया और सपा ने निर्भय सिंह पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन भाजपा से आनंद शुक्ला जीतने में सफल रहे। लेकिन दूसरे नंबर पर सपा से निर्भय सिंह पटेल रहे।


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