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अशोक गहलोत को सलाम, ईडब्ल्यूएस को उम्र में छूट, आयोग को फंड, आंगनबाडी सैलरी बढी़, गैरदलितों के संकट मोचन।

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rajasthan budget 2022


राजस्थान के  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज विधानसभा में वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते प्रदेश में 1 अप्रेल 2004 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा की है। सीएम गहलोत ने कर्मचारियों की वेतन कटौती का 2017 का फैसला वापस लेने का ऐलान भी किया। सीएम गहलोत ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से 1000 करोड़ का राजकोष पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। सीएम ने वंचित कर्मचारियों को  7 वें वेतनामान देने की घोषणा भी की है। सीएम गहलोत ने इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है।

कर्मचारी नेताओं ने किया स्वागत

कर्मचारी नेता राकेश कुमार मीणा, सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अभिमन्यु शर्मा और सचिवालय अधिकारी संघ के अध्यक्ष मेघराल पंवार एवं सहायक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामप्रसाद ने सीएम गहलोत के निर्णय के स्वागत किया है। इन सभी कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सीएम ने पुरानी पेंशन योजना बहाली की घोषणा करके कर्मचारियों को बड़ी राहत प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग कर रहे थे।



आंगनबाड़ी कार्मिकों का मानदेय 20 प्रतिशत बढ़ाया

सीएम गहलोत ने राज्य के विभिन्न विभागों में संविदा पर कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में 20 प्रतिशत मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है। सीएम गहलोत के इस निर्णय से मानदेय पर आधारित कार्मिकों को बड़ी राहत मिली है।

10 हजार होम गार्डस की भर्ती होगी

सीएम गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार समाज के सभी वर्गों को ध्यान रखती है। राज्य के युवाओं के अधिक से अधिक से रोजगार के अवसर मिले। इस दिशा में उनकी सरकार पूरा प्रयास कर रही है। सीएम ने कहा कि राज्य में 10 हजार होम गार्डस की भर्ती की जाएगी। ताकि प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके। सीएम की इस घोषणा से बेरोजगार युवकों को बड़ी राहत मिली है।

सवर्ण आयोग व विप्र आयोग, एससी एसटी एक्ट दुरूपयोग पर एक स्वस्थ्य निर्णय

राजस्थान की वर्तमान गहलौत सरकार नें सवर्ण व गैर दलित हित में जो निर्णय लियें हैं, उसको देखते हुए क्या चुनावी राज्यों के शेष चरणों में कांग्रेस को सवर्ण व गैर दलित समुदाय प्रभावी सत्यापित करेगा।


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राजस्थान सरकार द्वारा सवर्णों के लिए किये गये काम…

राजस्थान की अशोक गहलौत सरकार द्वारा सवर्ण समाज के लिए इस कार्यकाल में कई एक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये, जो अन्य प्रदेशों के लिए मिशाल बेमिसाल साबित होंगें, सवर्णों की एकजुटता व नोटा वोटों की बढ़ती संख्या नें सत्ताधारी व विरोधी दोनों खेमों की नींद हराम कर दी है, जिसका परिणाम आज हर स्तर पर सवर्णों के हितों को हर राजनैतिक दल संरक्षित करनें के लिये संकल्पित हो रहा है, जबकि इतिहास साक्षी रहा है कि तथाकथित स्वतंत्रता के बाद से आजतक सबसे ज्यादा उपेक्षा का शिकार हर स्तर पर केवल सवर्ण ही हुआ था।

100 करोड़ सवर्णों के उत्थान के लिए

हाल ही में राजस्थान की गहलोत सरकार नें अपनें बजट में 100 करोड़ की धनराशि गरीब सवर्णों के उत्थान के लिये आवंटित की है।

EWS उम्र सीमा छूट 5 वर्ष पुरुषों और 10 वर्ष महिलाओं के लिए।

वहीं आयु वर्ग की छूट के नाम पर महिलाओं को 10 वर्ष व पुरूषों को 5 वर्ष की छूट देनें का प्राविधान किया है। गहलोत सरकार भारत देश में पहली व अकेली सरकार है जिसनें गरीब सवर्ण समाज को आगे बढ़ानें के लिये कृत संकल्पित है।



SCST Act का दुरपयोग करने वालों के खिलाफ FIR का आदेश।

वहीं एससी एसटी एक्ट के दुरूपयोग को देखते हुए, गहलौत सरकार पहली व इकलौती सरकार है जिसनें एक्ट के दुरूपयोगकर्ता पर शिकायत पंजीकरण का आदेश दिया। जिससे समस्त गैर दलितों के हितों की रक्षा को बल मिलेगा।

विप्र कल्याण बोर्ड का गठन

वहीं राज्य की गहलौत सरकार का एक निर्णय विप्र कल्याण बोर्ड के गठन की मंजूरी मिलनें के बाद सनातन संस्कृति के संरक्षण का एक प्रकाश पुंज दिखा है जो सनातन की अच्क्षुणता को बनाये रखनें में सहयोगी होगा।

कैसे पडी़ सवर्ण वर्ग आयोग की बुनियाद?

सवर्ण महासंघ फाउंडेशन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. घनश्याम व्यास एवं प्रदेश सलाहकार जुगल किशोर उपाध्याय ने केंद्र सरकार से एससी एसटी आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग की तरह सवर्ण आयोग का गठन किए जाने की मांग की है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सवर्णों के लिए किसी भी आयोग का गठन नहीं किया गया है जबकि सवर्णों की भी अपनी समस्याएं हैं। इनके निराकरण के लिए सरकार को चाहिए कि वह सवर्ण आयोग का गठन करें। सवर्ण आयोग का गठन न होने से पूरा सामाजिक ताना-बाना अस्त व्यस्त हो चुका है। सामान्य वर्ग का एक बड़ा वर्ग समाज में रहता है। आयोग नहीं होने के कारण इस वर्ग की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। जिससे समाज के एक बड़े वर्ग को उपेक्षा का भाव महसूस हो रहा है। सरकार का ध्यान सवर्ण आयोग के गठन की ओर इंगित कर अनुरोध है कि सामान्य वर्ग के लिए सवर्ण आयोग का गठन कर उक्त समाज की समस्याओं के निराकरण हेतु एक फोरम उपलब्ध कराया जाए।


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