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कठुआ मासूम से गैंग रेप के मुख्य साजिशकर्ता सांजीराम की सजा निलम्बन के लिए पहुंचे हाई कोर्ट।

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कठुआ में आठ वर्ष की लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे मुख्य षड्यंत्रकारी सांजी राम की जमानत याचिका पर 24 फरवरी को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी।

न्यायमूर्ति तेजिंदर सिंह ढींढसा और न्यायमूर्ति ललित बत्रा की खंडपीठ के समक्ष याचिका वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के लिए आई। इस दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील आर. एस. चीमा ने नई तारीख देने का आग्रह किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। राम ने आपराधिक दंड संहिता की धारा 389 के तहत उच्च न्यायालय में आवेदन दिया। इस प्रावधान के तहत अपील लंबित रहने पर आरोपी सजा के निलंबन के लिए अदालत का रूख कर सकता है।

पठानकोट की सत्र अदालत ने राम को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसने इस अपराध को ‘पैशाचिक एवं भयावह’ करार दिया था। राम की याचिका में राहत देने का आग्रह करते हुए कहा गया, जाँच अभियोजन एजेंसी की जांच में कई खामियां हैं, साथ ही निचली अदालत में सुनवाई के दौरान बयानों में भी विसंगतियां हैं।”

इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों — जनवरी 2018 में जिस देवस्थानम में अपराध हुआ उसकी देखभाल करने वाला और षड्यंत्रकारी राम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और एक अन्य व्यक्ति प्रवेश कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। राम के बेटे विशाल को जहां बरी कर दिया गया वहीं तीन अन्य पुलिसकर्मियों को मामले को दबाने एवं साक्ष्यों को नष्ट करने के आरोप में पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई।

गौरतलब है कि अप्रैल 2018 में अदालत में दाखिल 15 पन्नों के आरोपपत्र में कहा गया कि दस जनवरी 2018 को लड़की का अपहरण किया गया और गांव के छोटे मंदिर में उसे चार दिनों तक बंधक बनाकर एवं बेहोश कर उससे बलात्कार किया गया और बाद में लड़की की हत्या कर दी गई थी। इस मंदिर की देखभाल विशेष तौर पर राम करता था।



क्या है पूरा मामला?

कठुआ में अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय की आठ साल की मासूम को घोड़ों को चराते समय10 जनवरी 2018 अगवा करने के बाद एक मंदिर में बंधक बनाकर सामूहिक बलात्कार किया गया और 13 जनवरी को उसकी हत्या कर दी गई थी। कठुआ गांव के इस मंदिर के संरक्षक और दो पुलिसकर्मियों समेत आठ लोगों को करीब दो महीने बाद उनकी कथित संलिप्तता को लेकर गिरफ्तार किया गया था। लेकिन मामला इसके बाद ज्यादा बड़ा हो गया था।

दरिंदगी की हद तक गए आरोपी

चार्जशीट में दरिंदगी की एक और बानगी दिखती है। इसके मुताबिक जब सभी आरोपी मासूम से बारी-बारी से रेप कर रहे थे, तब नाबालिग ने मेरठ में पढ़ने वाले अपने चचेरे भाई को फोन करके कहा कि अगर वह ‘मजा लूटना चाहता’ है तो आ जाए। इतना ही नहीं चार्जशीट के मुताबिक, बच्ची को मारने से ठीक पहले एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें कुछ देर के लिए रोका, क्योंकि वह अंतिम बार फिर रेप करना चाहता था। इसके बाद दूसरों ने भी फिर से बच्ची का रेप किया।

पुलिसकर्मियों ने भी दिया था बलात्कारियों का साथ

चार्जशीट में कहा गया है कि रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। मारने के बाद भी आरोपियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए मासूम मर जाए, उसके सिर पर पत्थर से कई वार किए। बाद में जांच के दौरान राम ने पुलिसकर्मियों को मामला दबाने के लिए 1.5 लाख रुपये की रिश्वत भी दी। जबकि मामले में कार्रवाई रिपोर्ट लिखने के करीब दो महीने बाद शुरू हुई।

कौन-कौन साबित हुआ कठुआ कांड में दोषी

आरोपियों में सांझी राम, सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, दो विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, हेट कॉन्स्टेबल तिलक राज और स्थानीय नागरिक प्रवेश कुमार को दोषी करार दिया गया है। इनके खिलाफ रेप, मर्डर और साक्ष्यों को छिपाने की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जबकि सांझी राम के बेटे विशाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

वकील को मिलती थीं जान से मारनें की धमकियां

पीड़िता की वकील राजावत को  आये दिन फोन पर अलग अलग नम्बरों से अलग अलग लोगों द्वारा जान से मारने की धमकी।

मामले में रेप नहीं हुआ, यह साबित करने में लगे थे संगठन

कई अलग-अलग मौकों पर यह साबित करने की कोशिश की गई कि कठुआ मामले में रेप नहीं हुआ है। यह हत्या का मामला है। देश के एक प्रतिष्ठित अखबार ने पहले पन्ने पर कठुआ मामले में नहीं हुआ है रेप जैसे शीर्षक से खबर प्रकाशित की। लेकिन स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर जे के चोपड़ा ने कहा कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने चीफ ज्यूडिशियरी मजिस्ट्रेट की अदालत के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच का प्रतिनिधित्व करने वाले चोपड़ा के अनुसार, डॉक्टरों ने कहा कि पीड़ित का यौन उत्पीड़न हुआ था और उन्होंने उसकी मौत के लिए दम घुटने को कारण बताया था।


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आरोप‌ियों को बचाने की हुई कवायद, निकाली गई थी तिरंगा यात्रा

4 मार्च 2019 को हिंदू एकता मंच की रैली में शामिल हिमांशु कुमार ने कहा कि आरोप पत्र में लगाए गए सारे आरोप गलत हैं। उनका कहना है कि केस को सीबीआई को सौंपना चाहिए। उनका कहना है कि क्राइम ब्रांच की जांच मनगढ़ंत है। उनका कहना है कि जो लोग गिरफ्तार किए गए हैं उनको पीटा गया है। आखिर एक बच्ची के रेप में इतने सारे लोग कैसे शामिल हो सकते हैं। इसी तरह की बात हिंदू एकता मंच के अध्यक्ष व बीजेपी के राज्य सचिव, एडवोकेट विजय शर्मा का कहना था. उन्होंने कहा था कि पुलिस ने अपने मन से कहानी बनाकर चार्जशीट दाखिल किया है। इसका कोई आधार नहीं है। शर्मा ने कहा था कि आप को क्या लगता है बाप और बेटे दोनों ने एक साथ मिलकर किसी का रेप करेंगे और उसकी हत्या कर देंगे। हम इस जांच को नहीं मानते।

उन्होंने क्राइम ब्रांच द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह कैसे संभव है कि किसी बच्ची को ‘देवीस्थान’ पर बंधक बना के रखा जाए, जबकि वहां मंदिर में रोज़ाना इतने लोग आते जाते हैं। कुछ कश्मीर आधारित पार्टियां इसे मुद्दा बनाना चाहती थी। आखिर केस को सीबीआई को सौंपने में क्या दिक्कत है?

मंत्रियों ने किया था आरोपियों का बचाव

तत्कालीन जम्मू कश्मीर के विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से उनके मंत्रिमंडल के दो सदस्यों को बर्खास्त करने की मांग की थी। इन मंत्रियों ने कठुआ बलात्कार और हत्या मामले में आरोपियों का बचाव करने का कथित तौर पर प्रयास किया था।

बैंक कर्मी ने कहा था अच्छा हुआ मर गई नहीं तो बड़ी होकर बनती सुसाइड बांबर

दूसरी तरफ कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुई ज्यादती और हत्या को सही बताने वाले केरल के पूर्व बैंक कर्मी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कर ली थी। बैंक कर्मी ने फेसबुक पर टिप्पणी की थी कि ‘अच्छा हुआ मर गई नहीं तो बड़ी होकर सुसाइड बमर बनती।’ इस टिप्पणी के वायरल होने के बाद बैंक ने कर्मी की सेवा समाप्त कर दी थी।

मां-बाप का जान से मारने की धमकी, नहीं मिली थी शव दफनाने की भी जगह

सबीना (काल्पनिक नाम) और याकूब (काल्पनिक नाम) अपने घर रासना में लौटने से डर रहे थे। उन्हें याद था कि अपनी मृत बेटी को दफनाने के लिए किस तरह उन्हें दर-दर भटकना पड़ा था। वह दोनों कई गांव गए लेकिन किसी ने भी इन्हें दफनाने के लिए जगह नहीं दी थी। आखिरकार सात किलोमीटर दूर जा कर इन्हें अपनी बेटी को दफनाना पड़ा था। गांव पहुंचने से पहले इन्हें धमकी दी जा रही थी। इनकी बेटी के साथ जो कुछ भी हुआ उसके लिए इन दोनों को ही ज़िम्मेदार ठहाराया जा रहा था।

पीएम मोदी ने आखिरकार दिया था बयान

जम्मू-कश्मीर के कठुआ गैंगरेप और उन्नाव मामले को लेकर पीएम मोदी नें  काफी समय बाद आखिरकार जब अपनी चुप्पी तोड़ी थी, पीएम मोदी ने दिल्ली में आंबेडकर मेमोरियल का उद्घाटन करते हुए कहा था, कि इन दोनों मामलों में बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा। उन्होंने कहा था कि गुनहगारों को कड़ी सजा मिलेगी। गैंगरेप की इन दो घटनाओं के बाद जहां एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें विपक्ष के निशाने पर थीं, वहीं दूसरी ओर देशभर में उबाल देखा जा रहा था।

यूएन का कठुआ पर बयान

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव “एंतोनियो गुतारेस” के प्रवक्ता “स्टीफन दुजारिक” नें मीडिया ब्रीफिंग में ये बातें कहीं थी। उन्होंने कहा था कि, “हमने बच्ची के साथ गैंगरेप के इस जघन्य अपराध की मीडिया रिपोर्टें देखी हैं। हमें उम्मीद है कि अधिकारी अपराधियों को कानून के दायरे में लाएंगे, ताकि बच्ची के साथ गैंगरेप और उसकी हत्या के मामले के सभी आरोपियों को कड़ी सजा मिल सके।” बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या के मामले पर महासचिव की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दुजारिक ने यह बयान दिया था।


 

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