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नारी का वास्तविक सशक्तीकरण कम, आभासी सशक्तिकरण ज़्यादा, सृस्टि की अद्भुत कृति हूँ मैं, हां स्त्री हूं मै : प्रियंका मिश्रा

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भारत जैसे पुरुष डोमिनेटेड देश में नारी ने अपने कार्य कौशल से अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

जौनपुर। आठ मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ना केवल हमें महिलाओं के योगदान, तपस्या और बलिदान की याद दिलाता है बल्कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करता है। इसी क्रम में ओमप्रकाश स्नाकोत्तर महाविद्यालय की प्रवक्ता प्रियंका मिश्रा नें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक कविता लिखकर महिलाओं को जागरूक किया।



श्रीमती मिश्रा ने एक प्रश्न के जवाब में बताया कि भारत जैसे पुरुष डोमिनेटेड देश में नारी ने अपनें कार्य कौशल से अपनी एक अलग पहचान बनाई है।साथ ही कार्य करते करते उनके द्वारा बहन, बेटी, बहन, दोस्त, पत्नी व मां की भूमिका निभाई गयी है। प्रियंका मिश्रा द्वारा लिखी गयी कबिता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार है….

“स्त्री हूं मैं,

सृस्टि की अद्भुत कृति हूँ मैं,

हां स्त्री हूं मै।

युगो युगो की शोषित,

कर अपने अस्तित्व को चिन्हित,

अपने कर्तव्य पथ पर अडिग हूं मैं,

हां स्त्री हूं मैं।

ना अहिल्या, ना मैं सीता स्वयं सिद्धा स्वयं हूं मैं,

स्त्री हूं मैं।

ना में शापित ना मैं शोषित।

गर्व हूं अभिमान हूं मैं,

स्त्री हूं मैं।

प्रकृति का सिंगार हूं, जीवन की लयताल हूं मैं,

हरे निराशा की बिरलता,

मृदुल सी झंकार हूं मैं,

हां स्त्री हूं मैं”….।


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प्रियंका मिश्रा एक कुशल प्रवक्ता के साथ साथ राष्ट्रीय महिला आयोग में महिलाओं का नेतृत्व भी कर चुकी है।कई बार महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित भी किया है। प्रियंका मिश्रा ने बताया कि महिलाएं अपने मान सम्मान के लिए आगे आएं, आज के इस पुरुष प्रधान समाज में नारी शक्ति का स्थान भी अद्वितीय है। ज्यादातर धन कमानें पुरुष जाता है। लेकिन धन मांगता है मां लक्ष्मी से, युद्ध के मैदान में भी पुरुष जाता है। लेकिन शक्ति मांगता है मां दुर्गा या मां काली से, इसी तरह ज्ञान की देवी भी मां सरस्वती को कहा जाता है।


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