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मध्यप्रदेश जनपद राजगढ़ की दो ग्रामपंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं का मुकदमा सरपंच, सचिव व रोजगार सेवक पर दर्ज।

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आखिरी सच वांट
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मध्यप्रदेश, राजगढ़। जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले 2 ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ खिलचीपुर थाने में एफ आईआर दर्ज कराई गई है। बता दें कि दोनों ही मामलों में आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े हुए मामले की शिकायत पर जांच हुई और जांच के बाद यह बड़ी कार्रवाई जिला पंचायत के निर्देशों पर जनपद पंचायत के माध्यम से कराई गई हैं। बता दें कि पिछले 3 महीने में पंचायत विभाग से जुड़े हुए कई कर्मचारी और रोजगार सहायक व सरपंच आदि के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कराई जा चुकी है। अभी भी शिकायतों का अंबार लगा हुआ है।

हरिपुरा में वित्तीय अनियमितता
जनपद की हरीपुरा पंचायत में वर्ष 2015 में लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितता की गई थी, जिसकी शिकायत ग्रामीणों के माध्यम से करने के बाद लंबे समय से जांच की जा रही थी। यहां लाखों रुपए के हेरफेर के मामले में जो जांच की गई तो तथ्य सत्य पाए जाने पर पंचायत प्रधान देवली बाई, तत्कालीन पंचायत सचिव राजेश शर्मा, और तत्कालीन रोजगार सहायक कैलाश वर्मा के खिलाफ धारा 420 और 409 के तहत यह प्रकरण दर्ज किया गया है।



खेरखेड़ी में तालाब निमार्ण में बरती लापरवाही
भोजपुर थाना अंतर्गत आने वाली खेरखेड़ी ग्राम पंचायत में तालाब निर्माण के साथ ही सुदूर सडक़ आदि के निर्माण से जुड़े हुए कार्यों में लापरवाही की गई। भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद जब जांच की गई तो पाया। सुदूर सडक़ निर्माण गोकुलचन्द के खेत से पप्पू के खेत तक ग्राम गोरधन में राशि रुपए 130000 एवं नवीन निस्तारी तालाब निर्माण बड़ी पहाड़ी के पास लक्ष्मणपुरा में राशि रुपए 95000 कुल योग राशि 225000 रुपये का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करना पाया गया है। मामले में जाँच के बाद पंचायत दानमल सेन सरपंच, प्रदीप पारीख तत्कालीन सचिव एवं दूलीचन्द लववंशी ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायत खेरखेडी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।


आर्युश


इंजीनियर को क्यों छोड़ा
दोनों ही ग्राम पंचायतों में यदि वित्तीय अनियमितताओं या फिर निर्माण कार्यों में लापरवाही की बात की जाए तो जितने भी जिम्मेदार हैं फिर चाहे रोजगार सहायक हो या पंचायत सचिव या फिर गांव के प्रधान तीनों के खिलाफ दोनों ही ग्राम पंचायतों में एफ आई आर दर्ज की गई है। लेकिन किसी भी गड़बड़ी का मूल्यांकन करने वाले इंजीनियर को दोनों ही ग्राम पंचायतों में छोड़ दिया गया। बता दें कि यह पहला मामला नहीं है जब पंचायत कर्मियों पर एफ आई आर दर्ज कर दी जाती है। लेकिन हमेशा गड़बड़ी के जिम्मेदार इंजीनियर को छोड़ दिया जाता है।


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