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गोरखनाथ मंदिर हमला, आतंकी शाजिस य राजनैतिक प्रयोग, विस्तृत तथ्यपरक जानकारी केवल आखिरी सच पर।

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आखिरी सच वांट
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गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर पर तैनात पीएसी जवानों पर रविवार की शाम हमला करने वाले कैंट क्षेत्र स्थित सिविल लाइंस निवासी अहमद मुर्तजा के मददगारों-करीबियों की पूछताछ के लिए धरपकड़ शुरू हो गई है। मुर्तजा को महराजगंज से बाइक पर बैठाकर गोरखनाथ मंदिर के निकट छोड़ने के दो आरोपितों को एटीएस ने उठाया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं गोरखपुर पुलिस ने भी आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

आपको बता दें कि पुलिस की गिरफ्त में आए अहमद मुर्तजा अब्बासी ने आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह परिवार के साथ मुंबई में ही रहता था। अक्तूबर 2020 से गोरखपुर आकर रहने लगा। परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि अहमद मुर्तजा अब्बासी शनिवार को ही घर से निकला था। घर में किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। अपने कमरे से भी बहुत कम निकलता था।

अहमद मुर्तजा अब्बासी 2 अप्रैल को नेपाल चला गया था। वहां से लौटकर रविवार की देर शाम उसने गोरखनाथ मंदिर मुख्य द्वार पर तैनात पीएसी के जवानों पर प्राणघातक हमला कर दिया। दोनों को गंभीर रूप से घायल करने के बाद उत्पात मचा रहे मुर्तजा को पुलिस कर्मियों ने धर दबोचा। इस सनसनीखेज घटना की जांच मिलने के बाद एटीएस ने ताबड़तोड़ दबिश शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक जांच में मालूम हुआ है कि नेपाल भागे मुर्तुजा को महराजगंज से बाइक पर बैठाकर दो युवकों ने गोरखनाथ मंदिर के निकट छोड़ा था। इतना ही नहीं नेपाल सीमा पर ही मुर्तुजा ने बांकी भी खरीद ली थी। यह मामला संज्ञान में आने पर एटीएस ने दोनों मददगारों को उठा लिया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि पुलिस की टीमें भी आधा दर्जन से अधिक लोगों हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही हैं।

सीसी टीवी कैमरे में कैद घटना

गोरखनाथ मंदिर के मुख्य द्वार और गोरखनाथ थाने की तरफ लगे सीसी टीवी कैमरे में पूरी घटना कैद हो गई है। पुलिस सीसी टीवी फुटेज के माध्यम से जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी अकेला था या फिर उसके साथ कोई और व्यक्ति आया था। अगर कोई मददगार था तो वह कौन था?

पहले से ही तलाश रही थी एटीएस

गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात पीएसी जवानों पर धारधार हथियार से हमले का आरोपी मुर्तजा अहमद अब्बासी के पिता मुनीर अहमद अब्बासी का दावा है कि 2 अप्रैल को ही उनके घर एटीएस की टीम पहुंची थी।

पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ा

गोरखनाथ मंदिर मुख्य गेट पर सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हमले के बाद पकड़े गए मुर्तजा की पहचान होने पर पुलिस टीम उसके पार्क रोड स्थित आवास पर पहुंची। पुलिस उसके माता-पिता, दो चाचा और चालक को पूछताछ के लिए साथ लेकर गई। देर रात तकरीबन दो बजे पूछताछ के उनको घर भेज दिया गया।

गोरखनाथ मंदिर हमला का आरोपी अहमद मुर्तजा अब्बासी सिरफिरा या सनकी नहीं शातिर किस्म का है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उसका शातिराना अंदाज सामने आ रहा है।

जिसे पुलिस के उच्च अधिकारी पहले सिरफिरा और सनकी मान रहे थे। लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ परत दर परत उसकी करतूत सामने आने के बाद अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। इंटरनेट एवं सोशल मीडिया का माहिर मुर्तजा कुछ प्रतिबंधित साइट से भी जुड़ा हुआ था। मुर्तजा उनकी गतिविधियों में कितना संलिप्त था, टीम उसकी जांच कर रही है।

10 मार्च को कोरियर से मंगाया था लैपटॉप

मुर्तजा ने हाल में एक नया और महंगा लैपटॉप भी खरीदा था। 10 मार्च को कोरियर से उसके घर लैपटॉप पहुंचा। उस लैपटॉप की कीमत तकरीबन एक लाख रुपये है। हालांकि उसके पिता मुनीर अहमद अब्बासी ने बताया कि उसका पुराना लैपटॉप खराब होने पर उन्होंने ही नया खरीदने की रकम दी थी।


शोभित भरद्वाज
शोभित भरद्वाज

मुर्तजा की दूसरी शादी की तैयारी में थे परिजन

मुनीर ने बताया कि मुर्तजा की पहली शादी अप्रैल 2018 में गाजीपुर की एक लड़की के साथ हुई थी। उनका निकाह धूमधाम से वाराणसी में हुआ था। हालांकि शादी के कुछ दिन बाद ही रिश्ता टूट गया। इधर उसकी दूसरी शादी की बात जौनपुर में चल रही थी।

पिता बैंकों में रह चुके हैं लीगल एडवाइजर।

मुनीर अहमद अब्बासी ने वर्ष 1985 में इलाहाबाद विवि से एलएलबी करने के बाद शुरुआती दौर में गोरखपुर सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस की लेकिन मन नहीं लगा। इसके बाद वह गोरखपुर में सेंट्रल बैंक के लीगल एडवाजर बने। बाद में लखनऊ जाकर बड़ौदा बैंक में काम किए। लखनऊ से वह परिवार के साथ मुम्बई चले गए। नवी मुम्बई में वह फ्लैट लेकर परिवार के साथ रहने लगे।

आरोपी बोला, मैं चाहता था पुलिस मार दे गोली
जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए आरोपी ने खुद का नाम अहमद मुर्तजा अब्बासी बताया है। उसने यह भी बताया है कि वह गोरखपुर के सिविल लाइंस का ही रहने वाला है। जबकि, शुरुआती पूछताछ में कुछ और ही बात सामने आ रही थी। बताया जा रहा था कि मुंबई से आया है। पुलिस ने पूछताछ की तो आरोपी ने बताया था कि नौकरी छूटने से परेशान था और इसी वजह से सोचा कि पुलिस पर हमला करुंगा तो उसे मार देगी। यही वजह है कि पुलिस पर उसने हमला किया। लेकिन, उसका यह बयान किसी के गले के नीचे नहीं उतर रहा है।

इस वजह से लग रही साजिश

आरोपी का यह कहना कि वह चाहता था कि पुलिस उसे गोली मार दे, अगर यह सही है, तो वह गोरखनाथ मंदिर ही क्यों गया? मंदिर के ठीक सामने ही थाना है, वहां भी पुलिस कर्मी रहते हैं। सिर्फ पुलिस से मरना ही उसकी चाहत थी तो एक हमले के बाद वह शांत हो जाता, उसने सिपाहियों पर ताबड़तोड़ कई वार क्यों किए? फिर मंदिर परिसर में जाने के लिए पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की कोशिश क्यों की? घटनास्थल से मिले बैग से एक और बांका मिला है। एक बांका हमलावर के हाथ में था। लैपटॉप, पैन ड्राइव भी मिली है। यह गैर इरादतन कैसे हो सकता है?

अगर उसे पुलिस के हाथों मरना ही था तो पकड़े जाने से पहले तक बचने की कोशिश क्यों की? मौजूद पुलिस वालों ने एक और आरोपित के होने की आशंका जताई है? आखिर वह कौन था?

सिपाही बोला, हथियार लहराते हुए अंदर दाखिल हुआ
सिपाहियों पर हमला करने के आरोपी को पकड़ने वाले सिपाही अनुराग राजपूत ने बताया कि सिपाहियों पर हमला करने के बाद हमलावर हथियार लहराते हुए मदिर के मुख्य द्वार से अंदर दाखिल हुआ था। अनुराग ने बताया कि गेट पर सिपाही मौजूद थे, जैसे ही चेकिंग करने को रोके हमलावर असलहा छिनने लगा और विरोध करते ही धारदार हथियार से हमला कर अंदर की ओर दौड़ा। उसका हाथ पकड़ने की कोशिश किया तो उसने मेरे ऊपर भी हमला कर दिया। इसके बाद पहले बैरक के पास रखे डंडे से हमला किया तो टूट गया और इसके बाद वह फिर हमलावर हो गया। दौड़कर स्टैंड के पास से मोटा डंडा लाकर आरोपी पर हमला किया तो उसके हाथ से धारदार हथियार छूट गया, जिसके बाद एलआईयू के अनिल भी आ गए और मौके से ही आरोपित पकड़ लिया गया।

12 साल बाद गोरखनाथ मंदिर में हुई आपराधिक घटना

इसके पहले वर्ष 2010 में गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित भीम सरोहर ताल के पास 2010 में विस्फोट होने पर सनसनी फैल गई थी। हालांकि, जांच के बाद यह पता चला था कि वह दिवाली वाला बम था।

मंदिर की सुरक्षा बढ़ाना अभी प्रस्तावित

अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों की तरह ही गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अभेद करने का प्रस्ताव तो तैयार है, लेकिन अभी शासन की ओर से अनुमति नहीं मिल पाई है। गोरखनाथ मंदिर के लिए एक एसपी का पद तो सृजित कर तैनाती कर दी गई है, लेकिन कमांडो और अन्य व्यवस्था होनी अभी बाकी है। कुछ महीनों पहले गोरखनाथ मंदिर व सीएम आवास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई योजना बनाई गई है। इसमें सुरक्षा को हाईटेक करने के साथ वर्तमान व्यवस्था में बदलाव करना है। एडीजी अखिल कुमार के आदेश और उनकी निगरानी में तत्काली एसएसपी रहे दिनेश कुमार प्रभु ने योजना तैयार करके शासन को भेजा था, लेकिन उस पर पूरी तरह से अमल नहीं हो पाया है।

नौ वाच टावर से होती है निगरानी

मंदिर परिसर में नौ वॉच टावर हैं। इसकी संख्या बढ़ाकर 14 की जानी है। टॉवर पर तैनात पुलिसकर्मियों आधुनिक असलहों से लैस हैं। अभी परिसर व उसके आसपास 100 सीसी टीवी कैमरे लगे हैं।

ऐसी है गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था

बम निरोधक दस्ता स्थायी तौर पर तैनात है।

सुरक्षा में एक प्लाटून पीएसी बल है।

875 पुलिस और सुरक्षा के लोग तैनात हैं।

गेट पर स्कैनर लगा है, जांच के बाद ही प्रवेश मिलता है।

सुरक्षा की मानीटरिंग के लिए कंट्रोल रूम बना है।

जब सीरियल ब्लास्ट से दहल गया था गोरखपुर

गोरखपुर शुरू से ही आतंकियों के निशाने पर रहा है। 1993 में मेनका टॉकिज में बम ब्लास्ट हुआ था। 2007 के दौरान शहर के सबसे व्यस्ततम बाजार गोलघर में सीरियल ब्लास्ट ने सबको हिला दिया था। इस ब्लास्ट में पाकिस्तान कनेक्शन भी सामने आया था। लिहाजा, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहती हैं।

आईआईटी मुंबई से की है केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई
पुलिस की गिरफ्त में आए अहमद मुर्तजा अब्बासी  ने आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह परिवार के साथ मुंबई में ही रहता था। अक्तूबर 2020 से आकर गोरखपुर रहने लगा। परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि अहमद मुर्तजा अब्बासी शनिवार को ही घर से निकला था। घर में किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। अपने कमरे से भी बहुत कम निकलता था।


डोनेशन
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