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योगी का आदेश ठेंगे पर, राजीव सिह पटेल कांस्टेबल जीआरपी महोबा नें पटेल ग्राम प्रधान की शह पर नाले की जमीन पर करवाया अवैध निर्माण, शुक्ला का रोंका रास्ता, प्रशासन नें हटवाया, लेकिन ध्वस्तीकरण का खर्च किस मद से उत्तर नदारद।

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चित्रकूट। जनपद के थानाक्षेत्र में घर के सामनें नाले व रास्ते की ग्रामसभा द्वारा अच्छादित व राजस्व विभाग के दस्तावेजों में दर्ज जमीन पर पूर्व पुलिस कर्मी व वर्तमान पुलिस कर्मी पुत्र द्वारा जबरन कब्जा करके नवनिर्माण करवाया गया, लेकिन आखिरी सच परिवार की तत्परता के चलते दिनांक 23 मई सोमवार को लेखपाल, कानूनगो व ग्रामप्रधान की मिलीभगत से जिस प्रकार नियोजित क्रम में कब्जा करवाकर निर्माण करवाया गया था वैसे ही तरीके से तुड़वा दिया गया।



शिकायतकर्ता राधेश्याम शुक्ला पिता मूरत ध्वज शुक्ला विवादित स्थान ग्राम कसाई का रकबा थाना कोतवाली कर्वी, तहसील कर्वी, कब्जा कर्ता पूर्व पुलिस कर्मचारी धीरज सिंह पुत्र राम लोटन, एवं उनका पुत्र वर्तमान पुलिस कर्मचारी संजीव सिंह पुत्र धीरज सिंह निवासी हाल मुकाम नई दुनिया बनकट जनपद चित्रकूट कब्जा वाली जमीन गाटा संख्या 382 जो रास्ता और नाला की भूमि है व धीरज सिंह की क्रय की हुई भूमि 383क है। जिस पर धीरज सिंह पटेल नें वर्दी की हनक व जातीय जोड़ को आत्मसात करके प्रधान पटेल व खुद पटेल के समीकरण को आत्मसात कर निर्माण शुरू करवा दिया।



लेखपाल व कानूनगो के कहनें पर दिया शिकायती पत्र

जबकि पीड़ित परिवार नें लेखपाल व कानूनगो से बात की जिसपर उन्ही द्वारा प्रदत्त राय के आधार पर पीड़ित नें शिकायत लिखी, जिसपर राय दाता कर्मियों द्वारा थूक कर चाटनें का काम किया गया। हां उपरोक्त साहबान नें कब्जा न हटवाकर निर्माण शुरू करवा दिया। जिन गरीब महिलाओं का दरवाजा बंद हो रहा है, उनका नाम सुधा शुक्ला पति शिव बरन शुक्ला एवं आशा शुक्ला पति राधेश्याम शुक्ला ग्राम रमयापुर थाना पहाड़ी जनपद चित्रकूट व हाल मुकाम ग्राम बनकट, थाना कोतवाली कर्वी, जनपद चित्रकूट के निवासी हैं। जो गरीब हैं और प्राइवेट दैनिक मजदूरी करनें वाले हैं।



इनके पिताजी 16 बीधे के किसान है। इन दोनों भाईयों के पास कोई जमीन नहीं हैं। जिस दरवाजे में विवाद है, दोनों भाईयों की पत्नियों के नाम है। यह दोनों भाई छत्तीसगढ़ में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड का काम कर अपनें परिवार का जीवन यापन करते हैं।



लेखपाल नें बताया जेसीबी का खर्च ग्राम पंचायत नें किया

जबकि उक्त मुद्दे पर जब हमारे प्रतिनिधि नें लेखपाल से उक्त कब्जे के क्रम में बात किया तो महोदय द्वारा बताया गया कि कब्जा कर जो निर्माण करवाया गया था, उसे हटवाया गया है, उक्त अतिक्रमण को हटवाये जानें के समय लेखपाल, कानूनगो व ग्राम प्रधान थे, जब प्रतिनिधि नें यह जानना चाहा कि आखिर अवैध कब्जा व निर्माणकर्ता पर क्या लिखित कार्यवाही हुई है, व इस ध्वस्तीकरण की कार्यवाही का खर्चा किस विभाग द्वारा किया गया तो लेखपाल नें ग्राम पंचायत के द्वारा खर्च वहन किये जानें की बात कही।



प्रधान नें बताया कोई पैसा नही दिया गया जेसीबी को

वहीं ग्राम प्रधान से जब हमारे प्रतिनिधि नें बात की व अवैध कब्जे के क्रम में कब्जाकर्ता पुलिसिया रंगरूट पर क्या जुर्माना लगाया गया, व जेसीबी का भाड़ा किसनें दिया, पर प्रधान जी नें बताया जेसीबी वाले को कोई भाड़ा नही दिया गया है, वह रास्ते से जा रहा था रोंककर यह ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करवा ली गयी।



कानूनगो का यह रहा बयान…।

वही कानूनगो ने बताया की ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करते हुऐ नाले में अवैध निर्माण को हटाया गया है। जब हमारे प्रतिनिधि द्वारा यह जानना चाहा गया कि आखिर अवैध निर्माणकर्ता पर क्या कार्यवाही की गई के क्रम में कानूनगो महोदय द्वारा बताया गया कि हम रिपोर्ट अपने उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर चुके हैं अब उनकी मर्जी जो करें।



निष्कर्ष क्या है…….. आखिरी सच का…?

सम्पूर्ण केस में पटेल प्रधान द्वारा, पटेल पुलिसिया जवान संजीव सिंह पुत्र धीरज सिंह निवासी हाल मुकाम नई दुनिया बनकट जनपद चित्रकूट, तैनाती महोबा जीआरपी से ट्रेन लेकर इलाहाबाद जाते हैं। की नौकरी को बचानें के लिये उच्चाधिकारियों को जानकारी दिये बिना यह ध्वस्तीकरण की कार्यवाही को अंजाम दिया गया। जबकि प्रदेश की योगी सरकार का फरमान प्रधान के जातीय समीकरण में बौना साबित हुआ।


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