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फर्जी सिम ममले में पुलिस की किरकिरी, खुशी को पहचाननें से मुकरे गवाह।

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कानपुर। विकास दुबे एनकाउंटर से चर्चित बिकरू कांड की आरोपित खुशी दुबे के फर्जी सिम मामले में सोमवार को अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका लगा। किशोर न्याय बोर्ड में पुलिस के दोनों गवाह मुकर गए, उन्होंने खुशी को पहचानने से इंकार करते हुए पुलिस की कहानी को ही गलत बता दिया। सिम मामले में आगे की सुनवाई 31 मई को होगी।

फर्जी सिम ममले में हुई पुलिस की किरकिरी खुशी को पहचाननें से मुकरे गवाह

फर्जी अभिलेखों से सिम लेकर प्रयोग करने के मामले में सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई हुई। खुशी को जेल से लाकर बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। पुलिस के दो गवाह संतराम और महेश गवाही देने पहुंचे। दोनों ने खुशी को पहचानने से इनकार करने के साथ सिम से संबंधित किसी तरह के दस्तावेज देने से साफ मना कर दिया।



बिक नहीं पाया विकास दुबे का गेहूं-चावल

बिल्हौर। बिकरू के पंचायत भवन में विकास दुबे द्वारा जमा किए गए 608 बोरी गेहूं और 45 बोरी चावल को सोमवार को नीलामी कराया गया। आखिरी बोली भी पूरे माल की एक चौथाई तक न पहुंचने से बेचा ही नहीं गया। सबसे बड़ी 1.5 लाख रुपये की बोली शिवराजपुर के विजय तिवारी ने लगाई। नायब तहसीलदार दिव्या भारती वर्मा ने इसकी रिपोर्ट बनाकर एसडीएम बिल्हौर को सौंप दी। विकास की पत्नी ऋचा दुबे ने डेढ़ साल पहले खाद्यान्न को अपना बताकर उसे रिलीज करने के लिए एसडीएम बिल्हौर को प्रार्थना पत्र दिया था जो निरस्त कर दिया गया था। कुल कीमत छह लाख रुपये बताई जा रही है।

पाक्सो कोर्ट में टली सुनवाई

अमर दुबे की पत्नी खुशी पर हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है, जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय 13 (पाक्सो कोर्ट) में भी चल रही है। सोमवार को मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अब न्यायालय ने सुनवाई के लिए दो जून की तिथि नियत की है।

क्या है पूरा मामला….?

कानपुर नगर के चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में दो जुलाई, 2020 को दबिश देने गई पुलिस टीम पर गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने फायरिंग कर दी थी। घटना में आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी थी। मामले में मुठभेड़ में मारे जा चुके अमर दुबे की पत्नी खुशी के खिलाफ एसआइटी (विशेष जांच टीम) ने फर्जी दस्तावेज लगा सिमकार्ड लेने की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। सोमवार को जेल से लाकर किशोर न्याय बोर्ड में खुशी को पेश किया गया।



सुनवाई के दौरान बचाव व अभियोजन पक्ष के मध्य जोरदार बहस हुई। एक गवाह ने कहा कि वह रिचा दुबे के यहां घरेलू नौकर था। 15 साल से खाना बनाने के साथ सब्जी लाने सहित अन्य काम देख रहा था। अपनी आइडी पर सिमकार्ड लिया था, जिसका प्रयोग रिचा दुबे रजामंदी से कभी- कभी करती थीं। पुलिस ने इस संबंध में उसका बयान दर्ज किया था, लेकिन खुशी दुबे को कभी नहीं देखा और न ही उसे पहचानता हूं। उसने खुशी के सिमकार्ड प्रयोग करने की बात से भी इन्कार किया।

वहीं, दूसरे गवाह ने भी कहा कि वह खुशी दुबे को नहीं पहचानता। बचाव पक्ष के अधिवक्ता शिवाकांत ने बताया, दोनों गवाहों ने खुशी को पहचानने से इन्कार कर दिया है। एसआइटी की रिपोर्ट को बोर्ड के समक्ष पहले भी उठा चुके हैं। बोर्ड में पेश की गई एसआइटी की रिपोर्ट की गुणवत्ता दोषपूर्ण है।

गवाह महेश ने कहा कि खुशी दुबे से वह कभी नहीं मिला है और न ही पहचानता है। खुशी को अपनी आईडी व सिम नहीं दिया है और न ही उसने कभी महेश के सिम का प्रयोग किया है। दूसरे गवाह मदारीपुर के संतराम ने कहा की गांव के ही राम सिंह ने आधार कार्ड व राशन कार्ड की छाया प्रति आवास दिलाने के नाम पर ली थी। उसे नहीं पता है कि उससे सिम लिया गया है। पुलिस से जानकारी मिली है कि उसकी आईडी से सिम लेकर इस्तेमाल किया जा रहा था। जिरह में खुशी के बावत कहा कि उसे नहीं जानता है। दरोगा ने खुशी के संबंध कोई बयान भी नहीं लिए हैं। अभियोजन अधिकारी जय सिंह ने गवाहों के बयान दर्ज कराए।



फर्जी सिम मामले की सुनवाई दो जून को होगी 

बिकरू कांड के मुख्य मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में चल रही है। अधिवक्ता रामनरेश मिश्रा ने बताया कि सोमवार को मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अब कोर्ट ने सुनवाई की तिथि दो जून तय की है। इसी कोर्ट में कुख्यात विकास दुबे की पत्नी रिचा पर दर्ज फर्जी आईडी से सिम लेने की सुनवाई हो रही है। इस मामले में भी कोर्ट ने दो जून की तिथि तय की है। वहीं मुख्य मामले में आरोपी बनाई गई खुशी की सुनवाई एडीजे 13 पॉक्सो एक्ट कोर्ट में चल रही है। वहां दो जून तिथि तय की गई है।

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