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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश, बृजभूषण शरण सिंह के सामनें बौना, आखिर क्यों नही भेजा गया सुनील त्रिपाठी को इलाज के लिये लखनऊ, जबकि डाक्टर नूपुर पाल नें किया था रिफर।

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गोण्डा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश, बृजभूषण शरण सिंह के सामनें बौना, आखिर क्यों नही भेजा गया सुनील त्रिपाठी को इलाज के लिये लखनऊ, जबकि डाक्टर पारूल पाल नें किया था रिफर।

जी हां जनपद गोण्डा में सांसद व विधायक बाप बेटों के दबदबे का आलम यह है कि जेल भेजनें के पहले तथाकथित शासन व प्रशासन द्वारा निरोजित रुप से घोषित अपराधी का न तो मेडिकल करवाया गया न ही आगे 5 दिनों तक जेल प्रशासन नें ही उक्त समाज सेवक के मेडिकल की जहमत उठाई। सत्ताधारी पार्टी के सांसद विधायक बाप बेटे के दबदबे का यह आलम है कि सारे अधिकारी व कर्मचारी उनकी जी हुजूरी के लिये मजबूर हैं।


पुलिसिया उत्पीड़न के शिकार सुनील त्रिपाठी की याददाश्त चली गयी, आखिरी सच की रिपोर्ट के बाद प्रशासन नें मेडिकल करवाया आज, मां व पत्नी की मिलाई की बात नही रही याद, लखनऊ किया गया रिफर।


दरासल मामला एक रेप पीड़िता जिसका रेप उसके बाप व सौतेले भाई नें किया था के पक्ष में सामाजिक संचार माध्यम पर आवाज उठानें के कारण सुनील त्रिपाठी जिसपर आज तक एक भी शिकायत पूरे प्रदेश में 151/ 107/ 16 का नही दर्ज है, लेकिन उक्त विधायक व सांसद के संरक्षण व विभाग को निर्देशन का परिणाम यह हुआ कि कोतवाली सदर गोण्डा में शिकायत लिखकर सुनील त्रिपाठी को उठा लिया गया और, एक सामाजिक कार्यकर्ता व बेबाक आलोचक को पुलिसिया थर्ड डिग्री ऐसी दी गयी कि एक जीनियस माइंड पर्सन अपनें आपको व परिजनों को नही पहचान पा रहा है, जेल में खाना भी नही खाता है, यहां तक की कपड़े भी उतार कर फेंक देता है।

जिसके क्रम में आखिरी सच पर प्रकाशित लेख का संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन व जेल प्रशासन नें अदालत के निर्देशन के बाद मेडिकल जांच तो जिला चिकित्सालय गोण्डा में डाक्टर नूपुर पाल नें किया था व तत्कालिक इलाज देकर लखनऊ शुघ्रातिशीघ्र भेजनें की बात कही थी। लेकिन आज तीसरा दिन बीतनें को है लेकिन जिला प्रशाहन नें सुनील त्रिपाठी को चिकित्सा हेतु किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय नही भेजा है, जबकि सुनील त्रिपाठी के पिता जी को 31 मई को यह कहा था कि 1 जून को सुनील को अवश्य लखनऊ भेज दिया जायेगा जिससे उनका सही ईलाज सुचारू किया जा सके।


सुनील त्रिपाठी उर्फ तिवारी के बर्बर पुलिसिया उत्पीड़न का सच, अपनी ही बेटी के बलात्कारी की नियोजित साजिश व विधायक प्रतीक भूषण सिंह के राजनैतिक विरोध का प्रभाव भुगत रहा परिवार। 


लेकिन आज 1 जून को जब पीड़ित त्रिपाठी के पिता सुबह से जेल के सामनें खड़े हैं लेकिन जेल प्रशासन उक्त सुनील त्रिपाठी को लखनऊ ले जानें में आनाकानी कर रहा है, क्या गोण्डा प्रशासन त्रिपाठी को मार देना चाहता है, खैर चाहेगा भी क्यों नही त्रिपाठी ही तो अकेला व्यक्तित्व ही बचा है पूरे गोण्डा में जो सच को सच ल गलत को गलत बेबाक तरीके से निडर होकर करते हैं, जब यह व्यक्ति नक्षी रह जायेगा तो शासन व प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन, शराब व कटान का कार्य धड़ल्ले से चलता रहेगा।


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