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राम की पैढ़ी में स्नान कर रहे युगल को किस करनें का आरोप लगाकर सामाजिक ठेकेदारों नें पीटा।

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सामाजिक संचार माध्यम ट्वीटर पर एक वीडियो लगातार विभिन्न हैण्डल्स से प्रसारित करके भ्रम फैलाने का प्रयास बड़े बड़े हैण्डल्स के माध्यम से जारी है। क्या वुडियो को प्रसारण करनें के पहले इनमें से किसी नें बारीकी से इसके हर भाग का निरीक्षण किया शायद नही करे भी क्यों टीआरपी की चाह नें हर किसी को जल्दी जल्दी का आदी बना दिया है।

https://mobile.twitter.com/Suneet30singh/status/1539530199921852416?s=09

अयोध्या में राम की पैड़ी पर सरयू नदी में स्नान कर रहे पति और पत्नी पर कुछ लोगों ने हमला बोल दिया और पति को गाली देते हुए बेरहमी से पीटा। पुलिस ने बताया कि अयोध्या कोतवाली पुलिस थाना अंतर्गत सरयू नदी के किनारे की यह घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो बुधवार को वायरल हुआ। वीडियो में दिख रहा है कि एक युवा दंपति नदी में स्नान कर रहा है और चूंकि महिला तैरना नहीं जानती, इसलिए तेज बहाव के डर से पुरुष ने उसे पकड़ रखा है।


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उन्होंने बताया कि कुछ अज्ञात कथित बदमाशों ने पुरुष और महिला को खींचकर पानी से बाहर किया और पुरुष की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। लोगों का आरोप था कि यह दंपति साथ में स्नान कर अश्लीलता फैला रहे थे।

लोगों ने कहा- सार्वजनिक जगहों पर नहीं करनी चाहिए ऐसी अभद्रता

वीडियो में देखा जा सकता है, एक नव दंपति राम की पैड़ी पर स्नान कर रहा है| इसी दौरान पति-पत्नी ने कथित तौर पर किस कर लिया जिसके इसके बाद पति के पास राम की पैड़ी में नहा रहे युवकों का एक दल आता है और उन पर अश्लीलता का आरोप लगाकर पति की पिटाई शुरू कर देता है। पत्नी, अपने पति को बचाने की कोशिश करती है लेकिन युवकों की बढ़ती भीड़ देख वह डर जाती है। लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सार्वजनिक जगहों पर ऐसी अभद्रता नहीं करनी चाहिए।



मामले पर पुलिस का क्या कहना है

पुलिस ने कहा कि उसे इस घटना के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और दंपति और हमला करने वाले कथित बदमाशों को तलाशने का प्रयास कर रही है।

उपरोक्त स्क्रीनशाट उसी वीडियो से लिया गया है, जिसमें पुरूष और महिला (पति- पत्नी) के मुह के बीच सबसे कम दूरी की एकमात्र पोज यह है, तो “किस” के अफवाह को हवा देकर उक्त व्यक्ति के साथ यह ज्यादती व मार पीट करके सामाजिक मर्यादा का पतन क्यों किया गया…?

आखिर इन समाज के तथाकथित आलम्बरदारों को ऐसा निर्णय सार्वजनिक रूफ से लेनें का आधिकार इन्हें किसनें दिया, वह भी सत्यता की पड़ताल को किये बिना यह भीड़तंत्र कानून किसकी शह पर है। वीडियो पहली बार किसके द्वारा अपलोड किया गया यह भी जांच का विषय है।


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