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जेठा भाई राठौर पूर्व विधायक, गुजरात नमूनें व सरकारी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह, ईमानदारी की प्रतिमूर्ति को नही कोई सरकारी इमदाद।

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आज के सांसदों और विधायकों का रुतबा किसी से छुपा नहीं है। जनप्रतिनिधि यानि नेता के नाम पर ब्लॉक प्रमुख से लेकर प्रधान तक नेतागिरी के रौब में रहते हैं। ये सभी जनता के सेवक माने जाते हैं लेकिन लगभग सबके पास गाड़ी, मकान और दूसरी संपत्ति आम तौर पर मिल जाएगी। पूर्व विधायक और पूर्व सांसदों की भी समाज में अच्छी सामाजिक और आर्थिक हैसियत होती है। लेकिन इन्हीं पूर्व विधायकों में एक ऐसे भी पूर्व विधायक हैं जिनकी कहानी आपके दिलोदिमाग को झकझोर देगी। आमतौर पर देश में विधायक या सांसद अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन समेत कई भत्तों के हकदार होते हैं। उन्हें रिटायरमेंट के तौर पर कई सुविधाएँ मिलती हैं। लेकिन गुजरात के एक पूर्व विधायक जेठाभाई राठौड़ को कार्यकाल पूरा करने के बाद ना तो पेंशन मिली और ना ही अन्य भत्ते। तंगी का आलम यह है कि, पूर्व विधायक को बीपीएल कार्ड से मिल रहे अनाज से अपना गुजारा करना पड़ रहा है। उन्‍हें कोर्ट के आदेश के बावजूद पेंशन नहीं मिली है।



झोंपड़ी जैसा घर, बेटे करते हैं मजदूरी

जेठाभाई राठौर का घर ऐसा है की झोपड़ी की परिभाषा में भी उसे नहीं रख सकते , उसके घर के बाहर गाड़ी की तो कल्पना करना भी बेकार है। यदि आप उनका झोपड़ी जैसा घर देखना चाहते हैं, तो आपको विजयनगर तालुका के तेबड़ा गांव जाना होगा। जहां उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिला एक झोपड़ी जैसा घर है। उनके पांच बेटे अभी भी मजदूरी का काम करते हैं। शाम के समय घर पर खाने की भी दिक्कत हो जाती है।

ईमानदारी की जिंदगी का इनाम बीपीएल कार्ड के सहारे जिंदगी

80 साल से ज्यादा उम्र के जेठाभाई राठोड ने अपना जीवन अपने सिद्धांतों पर जिया है। खेडब्रह्मा- विजयनगर सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की।

कांग्रेस को हराकर निर्दलीय जीते थे जेठाभाई

गुजरात के साबरकांठा जिले के छोटे से गांव टेबड़ा के रहने वाले जेठाभाई राठौड़ ने 1967 में खेड़ब्रम्हा विधानसभा में कांग्रेस के सामने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 17,000 वोटों से जीत हासिल की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेठाभाई ने बताया कि एक समय वे साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे और गांधीनगर भी सरकारी बस से ही जाया करते थे।



कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली पेंशन

जेठाभाई बताते हैं कि, उन्‍होंने अपने क्षेत्र की जनता की पूरी सेवा की और सुख-दुख में उनके साथ रहे। सरकार ने उन्‍हें पेंशन नहीं दी।’वीटीवी गुजराती’ के अनुसार जेठाभाई ने कई बार इसको लेकर आवेदन दिए और चक्‍कर काटे, परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद वे अपने इस मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे। लंबे समय तक लड़ाई लड़ने के बाद कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था, इसके बाद भी आज तक पेंशन नहीं मिली।



बीपीएल कार्ड के सहारे कट रही है लाइफ

जेठाभाई के पांच बेटे हैं। पूरा परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपना परिवार चला रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जेठाभाई किसी तरह जीवन यापन कर पा रहे हैं। उन्‍हें उनकी पेंशन नहीं मिल सकी है, जबकि वे इसके हकदार हैं।जेठाभाई राठौड़ का पूरा परिवार बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) राशन कार्ड के सहारे अपना जीवन यापन करने मजबूर हैं। वे इसके हकदार हैं। उनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए। लेकिन फिर भी पेंशन नहीं मिली। इन दिनों जेठाभाई साबरकांठा जिले के टेबड़ा गांव में रह रहे हैं।

इलाज के लिए पैसे तक नहीं हैं पूर्व विधायक के पास

जेठाभाई के परिजनों का कहना है कि स्‍वास्‍थ्‍य खराब होने की स्थिति में सही इलाज नहीं करा पाते हैं और इस गांव में उनके लिए ठीक जगह भी नहीं है। अब जेठाभाई के परिवार और गांववालों ने सरकार से उनकी मदद के लिए अपील की है।जेठाभाई ने बताया कि एक समय वे साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे, और गांधीनगर भी सरकारी बस से ही जाया करते थे। उन्‍होंने अपने क्षेत्र की जनता की पूरी सेवा की और सुख-दुख में उनके साथ रहे। सरकार ने उन्‍हें पेंशन नहीं दी। ‘वीटीवी गुजराती’ के अनुसार जेठाभाई ने कई बार इसको लेकर आवेदन दिए और चक्‍कर काटे, परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद उन्‍होंने अदालत में गुहार लगाई कि उन्‍हें पेंशन दी जाए। लंबे समय तक चली इस अदालती कार्रवाई के बाद फैसला उनके पक्ष में आया था। हालांकि इस फैसले के बावजूद उन्‍हें पेंशन नहीं मिली है। जेठाभाई के 5 बेटे हैं, जो मेहनत-मजदूरी कर अपना परिवार चला रहे हैं।



तंगहाली में जी रहे जेठाभाई 

ग्रामीणों का कहना है कि जेठाभाई किसी तरह जीवन यापन कर पा रहे हैं। उन्‍हें उनकी पेंशन नहीं मिल सकी है, जबकि वे इसके हकदार हैं। उनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए।

आज के गिरगिट नेताओं से उकता चुके लोगों की संतुष्टि का कारक हैं जेठा भाई राठौर

एक ऐसे दौर में जब विधायक अपनी अकूत संपत्ति के कारण केंद्रीय जांच एजेंसियों से डरकर कर खुले बाजार में सब्जी की तरह बिक रहे हैं, दल बदल कर रहे है, एक राज्य से दूसरे राज्य विशेष विमान से भटक रहे हैं, पांच- सात सितारा होटल में मजे कर रहे हैं, दल ऐसे बदल रहे है जिससे गिरगिट भी शरमा जाये, 2016 से 2020 तक चार साल में 405 विधायक दल बदल कर चुके हो, और कितने दलबदल को तैयार हो, अकेले भाजपा में 182 विधायक शामिल हो चुके हो, दल बदल और खरीद फरोख्त से कोई दल अछूता नहीं है, यह सब देखकर अगर आपके मन में लोकतंत्र के लिए घृणा पैदा हो रही हो, तो गुजरात के एक ऐसे पूर्व विधायक हैं जिन्हे जानकर आपके मन में लोकतंत्र के लिए आस्था और पूर्व विधायक के लिए मन में सम्मान पैदा हो जायेगा। खेडब्रह्मा- विजयनगर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधायक बने जेठाभाई राठौर आज भी बीपीएल कार्ड रखते हैं और गरीबी में जीवन व्यतीत करते हैं।
गुजरात के एक पूर्व विधायक की जो गरीबों से भी बदतर हालत में जी रहे हैं। दो वक्त के खाने के लिए भी खाना भी मुश्किल से मिलता है।


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