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एससी एसटी एक्ट बना अपराधियों का हथियार, अनुसूचित जाति जनजाति थाना बना अपराधियों का संरक्षण केंद्र, कैमूर बिहार के तीन फर्जी मुकदमों पर हमारी रिपोर्ट, प्रथक व विस्तृत रिपोर्ट क्रमशः

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कैमूर/ बिहार संवाददाता कुमार चन्द्र भूषण तिवारी की रिपोर्ट। जिला के अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के अपराधियों के लिए दलित एक्ट हथियार के रूप में कार्य कर रहा है, तो अनुसूचित जाति जनजाति थाना अपराधियों का संरक्षण केंद्र बन चुका है। आपको बताते चलें कि सरकार द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लिए सभी प्रदेशों के सभी जिला में विशेष थाने एवं विशेष कोर्ट का व्यवस्था किया गया है। पर देखने को यह मिल रहा है कि इस वर्ग के अपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपराध करके दंड से बचने के लिए एवं धन उगाही के लिए आए दिन दलित एक्ट का दुरुपयोग कर रहे हैं।



फर्जी एससी एसटी एक्ट प्रकरण एक

अभी ताजा मामला कैमूर जिला के रामपुर प्रखंड अंतर्गत खरेंदा पंचायत के मुखिया एवं रोजगार सेवक के मिलीभगत से, मृतकों के नाम पर खानापूर्ति करते हुए सरकारी धन का गमन किया गया। जब इस संदर्भ में पंचायत वासी भोरेयाँ ग्रामवासी संतोष यादव द्वारा, विरोध किया गया तो मुखिया द्वारा दलित एक्ट के तहत केस कर दिया गया।

फर्जी एससी एसटी एक्ट प्रकरण दो

अभी उपरोक्त मामले की जांच चल ही रही थी कि रामपुर प्रखंड के तिलोई ग्राम के निवासियों द्वारा, अतिक्रमण के विरुद्ध आवेदन दिया एवं पैरवी किया गया, जिसके वजह से अतिक्रमण पर करवाई होते देख, वहां के अनुसूचित जाति द्वारा आवेदकों के ऊपर ही मनगढ़ंत कहानी बनाकर दलित एक्ट लगा दिया गया।



जबकि कानूनतः एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक है। पर अनुसूचित जाति जनजाति के थानाध्यक्ष द्वारा मनमाने ढंग से बिना जांच किए हैं, एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। दलित एक्ट में केस दर्ज होने पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा जांच आवश्यक होता है। पर उनके द्वारा भी इन दोनों मामले में स्थल पर पहुंचने के बाद भी जाँच सही रूप से नहीं किया गया।

जब इस संदर्भ में थाना अध्यक्ष से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि आवेदक तेतरी देवी पति जगदीश पासवान के साथ मारपीट किया गया है। जिसकी मेडिकल रिपोर्ट भी हमारे पास आया है। जबकि हमारे संवाददाता द्वारा इस विषय में जांच किया गया तो यह पाया गया कि 3 सितंबर को तेतरी देवी द्वारा जाति सूचक शब्द एवं मारपीट का आरोप लगाते हुए दलित एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है। एवं मेडिकल रिपोर्ट दिन के 10:00 से 12:00 बजे का है। जबकि थिलोई गांव के ग्रामवासियों से जानकारी मिली की उस दिन कोई किसी के साथ मारपीट हुआ ही नहीं था।


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सिर्फ आवेदक पक्ष शोर शराबा मचाते हुए तथाकथित अपराधियों को ही गाली गलौज किया है। तेतरी देवी जिसे चोट लगने की बात कहा जा रहा है। वह स्कूल के रसोई में भोजन बनाती हैं और उस दिन भी 9:00 बजे से करीब 2:30 बजे तक स्कूल परिसर में रही हैं, एवं स्कूल के पंजी में उनकी उपस्थिति दर्ज है। जब इस बात की जानकारी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुनीता कुमारी को दिया गया तो उन्होंने कहा कि, आगे जांच कर उचित कार्यवाही किया जाएगा।

फर्जी एससी एसटी एक्ट प्रकरण तीन

वही 20 सितंबर को वन विभाग के कर्मियों द्वारा, वन विभाग की भूमि को अतिक्रमण करने से रोकने पर, करमचट थाना क्षेत्र के लेवाबांध में वन कर्मियों के ऊपर अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के द्वारा वन विभाग के अधिकारियों एवं सुरक्षाकर्मीयों पर हमला कर दिया गया, जिससे कि अनेकों सरकारी कर्मी घायल हो गए। इतना ही नहीं वनकर्मियों का वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहां से जैसे- तैसे वे अपनी जान बचाकर भागे, पर दलित समाज द्वारा उनके ऊपर दलित एक्ट लगाते हुए अनुसूचित जाति जनजाति थाने में मामला दर्ज कराया गया। जबकि वन विभाग के कर्मियों द्वारा करमचट थाना में इन सभी के विरुद्ध तत्काल मामला दर्ज कराया जा चुका था।



जिसके संदर्भ में थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह उर्फ सिंघम द्वारा बताया गया कि प्रथम दृष्टया जांच से मामले में सत्यापन आरोपियों के विरुद्ध है छापेमारी जारी है। ऐसी कोई एक दो मामला नहीं है इस तरह का अनेकों मामले आए दिन जिला के अंदर देखने को मिलते हैं। कि इस वर्ग विशेष के लोग अपराध करते है, और अपराध से बचने के लिए मनगढ़ंत कहानी बनाकर सच्चे लोगों को ही परेशान करते हैं। और मोटी से मोटी रकम मिलने के बाद सुलह करते हैं। अब देखना यह है कि कहां तक यहां के प्रशासनिक पदाधिकारी सच्चाई को सामने ला रहे हैं।

आखिरी सच बिहार प्रतिनिधि व स्थानीय टीम उक्त तीनों मुद्दों पर क्रमशः अलग- अलग विस्तृत रिपोर्टें स्थानीय जानकारियों पर आधारित तीनों घटनाओं का आखिरी सच जल्द अपनें पाठकों के समक्ष रखते हुऐ समस्त जिम्मेदारों को प्रेषित करेगी।


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