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देश के प्रथम अग्निवीर होमगार्ड्स का गौरवशाली इतिहास, उत्पीड़न जान कर निकल जाएंगे पत्थर दिल के भी आंसू, हिमाचल प्रदेश से होमगार्ड ने फिर लिखी प्रधानमंत्री को चिट्ठी।

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देश के मौजूदा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 2017 में स्थाई पॉलिसी के तहत हिमाचल प्रदेश होमगार्ड्स को नियमित रोजगार का किया था वादा, होमगार्ड का मिला था खुला समर्थन।

वायदा खिलाफी से प्रदेश के होमगार्ड निराश : चोड़िया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2014 में कर आए थे बड़े बड़े वायदे !

अपनी मांगों को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को होमगार्ड ने पुनः लिखा खुला पत्र

साहिल गुप्ता : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने देश के सैन्य बलों की भर्ती के लिए नई पॉलिसी त्यार करली है। जिसे अग्निवीर नाम दिया गया है। अग्निवीर योजना को जहां अनेकों ने सराहा है, वहीं बहुत से बुद्दिजीवियों ने इस योजना को लेकर अपनी असहमति भी जताई है। वहीं बात करें देश के प्रथम सैन्य बल की तो एकाएक होमगार्ड्स की सेवाएं आंखों के सामने आने लगती हैं। यदि होमगार्ड्स को देश के प्रथम अग्निवीर कहा जाए तो कोई गलत नही होगा ! देश की सीमाओं व आंतरिक रक्षा सुरक्षा तथा सेवाओं में हमेशा तत्त्तपर रहने वाले होमगार्ड्स के “होमगार्ड एक्ट” का गठन अंग्रेजों के समय 6 दिसंबर 1946 को पुलिस सहायक के रूप में हुआ था। इससे पहले भी होमगार्डस देश में अपनी सेवाएं देते रहे। देश की आजादी के बाद 1956 की तथाकथित सरकार ने होमगार्ड्स को स्वयंसेवी घोषित कर दिया। जिसके बाद होमगार्ड्स के शोषण की शुरुआत होंने लगी। यहां आपको बतादें की वर्ष 1947 से लेकर 1978 तक होमगार्ड व पुलिस का सामान वेतन था, लेकिन 1978 के बाद इनपर स्वयंसेवी एक्ट का असर दिखने लगा। जिसके बाद होमगार्ड्स का शोषण इस कदर बढ़ गया कि देश के नेता व प्रशासनिक आलाधिकारी इन्हें न केवल प्रताड़ित करने लगे, बल्कि अपने निजी काम भी इनसे लेने लगे। यदि कोई होमगार्ड इस प्रताड़ना का विरोध करता तो रेगुलर ना होने के चलते उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी देदी जाती।

होमगार्डस का कुर्बानियों भरा रहा इतिहास

ये वही होमगार्ड्स हैं जिन्होंने समय-समय पर देश पर हुए सरहदी हमले, संकट व किसी भी प्रकार की आपदा में अपनी जान की परवाह किए बगैर अनेकों कुर्बानियां दी, लेकिन देश को संकट से बचाया। फिर चाहे वो हैदराबाद का भारत मे विलय हो, भारत पाकिस्तान युद्ध, चीन युद्ध, बांग्लादेश युद्ध, पंजाब में आतंकवाद का दौर, कुंभ मेले, यहाँ तक कि उज्जैन गैस त्रासदी भी। इन त्रासदियों के विरुद्ध होमगार्ड्स ने ना केवल बढ़चढ़ हिस्सा लिया, बल्कि अनेकों कुर्बानियां भी दी। होमगार्ड्स वर्ष 1984 तक भारतीय थल सेना के साथ सीधे तौर पर जुड़ कर सेवाएं देता था। 26-11 मुंबई आतंकी हमले में भी होमगार्ड का जवान शहीद हो गया था। आज भी होमगार्ड्स ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर नेताओं की रैलियों की सुरक्षा तक को भी देखते हैं। देश प्रदेश में कहीं त्रासदी हो जाए याँ कोई प्रकृति आपदा, होमगार्ड हर मुसीबत में फ्रंटलाइन के रूप में काम करता है। यहां तक की कॅरोना जैसी भयंकर महामारी में भी होमगार्ड्स ने अपनी जान की परवाह किए बगैर प्रथम पंक्ति में रहकर सेवाएं दी। अनेकों बार ड्यूटी पर काम करते होमगार्ड अपनी जान गवा देते हैं।

होमगार्ड्स हित सरकारों के एलान व सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए फैंसले आज भी धूल भरी फ़ाइलों में अटके

भारत चीन युद्ध के बाद प्रथम सेनापति फील्ड मार्शल जनरल करियप्पा व लार्ड माउंट वेटन द्वारा 1965 में होमगार्डस के बड़े हुए कार्य को देखते हुए अनुशंसाएं की। जिस पर भारत शासन ने 1966 में होमगार्ड्स को नियमित करने हेतु राज्य सरकारों को लिखा। वर्ष 1980 में आठवीं विनायल कॉन्फ्रेंस की गई। जिसमे सभी सांसदों द्वारा तीन वर्ष के बाद होमगार्ड्स को लाभप्रद नोकरी देने के आदेश दिए गए, जिसमे इन्हें सी और डी ग्रुप में तब्दील करने की बात कही गई और राज्य सरकारों से आग्रह किया। लेकिन किसी भी राज्य सरकार ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया। जिसके बाद वर्ष 1981, 1983 व 1984 में पत्राचार लागू किए गए तो 10 से 11 राज्यों में इसे आरक्षण के साथ लागू कर दिया। बाकी राज्यों में तो इसे लागू ही नहीं किया गया। इसके अलावा वर्ष 2006 में गृहमंत्री शिवराज सिंह पाटिल द्वारा होमगार्डस को सिपाही के रूप में तब्दील करने के लिए राज्य सरकारों से खर्चे का आकलन करने को कहा। जिसके बाद उक्त फाइल भी दब कर रह गई। इसके इलावा 2003 में माननीय सर्वोच्च न्यालय के जस्टिस धर्माधिकारी व जस्टिस बृजेश कुमार जी ने अंशकालिक होमगार्ड के साथ पूर्णकालिक की तरह व्यवहार करने व उन्हें वह हर सुविधाएं देने को कहा था जो हर राज्य सहस्त्र बल को मिलती हैं। इसके इलावा अब 2022 हाल ही में ग्रहमन्त्रलय द्वारा नियम 1965 व नियम 1969 में परिवर्तन की बात करने के लिए राज्य सरकारों से सुझाव मांगे गए।

मूलभूत सुविधाओं से वंचित होमगार्ड

यहां बताने योग्य है कि जिस इपीएफ काटने व ग्रेजुएटी की सुविधा प्राइवेट सेक्टर में भी उपलब्ध है, होमगार्ड्स को ऐसी आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित रखा गया। यहां तक की होमगार्ड के रिटायर होने पर इन्हें पेंशन देने का भी कोई प्रावधान नहीं है। होमगार्ड्स के पास किसी प्रकार के कोई आधुनकि हथियार तक नही हैं, लेकिन काम पुलिस के साथ करते हैं। नियमित न होने के चलते होमगार्ड का अचानक ट्रांसफर उसके गृह जिले से काफी दूर कर दिया जाता है, जिससे होमगार्ड के परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूरदराज ट्रांसफर किए गए होमगार्ड को रहने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं करवाई जाती। अनेकों जगह पर होमगार्ड को 12 महीने रोजगार नही दिया जाता, जिससे कई बार तो परिवार में खाने के लाले तक पड़ जाते हैं। इस तरह होमगार्ड की जिंदगी बद से बदतर होती जा रही है।

देश के मौजूदा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 2017 में स्थाई पॉलिसी के तहत हिमाचल प्रदेश होमगार्ड्स को नियमित रोजगार का किया था वादा, होमगार्ड का मिला था खुला समर्थन।

 

समय-समय पर देश प्रदेश के होमगार्डस ने इस जुल्म को रोकने के लिए ना केवल आंदोलन किए, बल्कि स्थाई पॉलिसी के तहत इन्हें नियमित कर 12 महीने रोजगार देने के लिए समय-समय की सरकारों और नेताओं को मांगपत्र देते रहे। इसके इलावा देश प्रदेश के होमगार्ड्स निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक भी अपनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनाव नजदीक आते ही होमगार्डस को नियमित करने के बड़े-बड़े वादे व प्रलोभन देखकर इनके परिवारों तक के वोट तो ले लिए जाते हैं, लेकिन सरकार बन जाने के बाद सब भूल जाते हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 की बात करें तो बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बिलासपुर में हिमाचल प्रदेश होमगार्ड्स को स्थाई पॉलिसी के तहत 12 महीने रोजगार सहित कई बड़ी बड़ी बातें कर लुभाया था, जिसके बाद प्रदेश के होमगार्डस ने भाजपा को खुला समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। सरकार बनने के बाद हिमाचलप्रदेश होमगार्ड्स ने ना केवल पत्राचार राही सरकार को अपनी जायज मांगो की याद दिलाई, बल्कि कई बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिले। लेकिन हर मुख्यमंत्री द्वारा एक नया आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता। अभी हाल ही में मंडी में हुए होमगार्ड्स के एक सम्मेलन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश भर से आए होमगार्ड्स को संबोधित करते हुए प्रदेश में पुनः भाजपा की सरकार बनने पर स्थाई पॉलिसी के तहत 12 महीने रोजगार देने का दोबारा आश्वासन दे दिया। जिसके बाद कुछ अखबारों में यहां तक छप गया कि मुख्यमंत्री ने होमगार्ड्स को 12 महीने रोजगार देने का एलान कर दिया है। वहीं प्रदेश के होमगार्डस का कहना है कि ना तो ऐसा वहां पर कुछ कहा गया और ना ही सरकार द्वारा कोई ऐसा नोटिफिकेशन जारी हुआ है।

2014 में प्रधानमंत्री नरिंदर मोदी कर आए थे बड़े बड़े वादे !

2014 में देश के प्रधानमंत्री नरिंदर मोदी ने जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों के मद्देनजर 28 नवंबर 2014 को उधमपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए यहां तक कहा था कि उनकी सरकार बनने पर होमगार्ड्स के हर सुख सुविधा की चिंता सरकार करगे। जिसके बाद प्रदेश सहित देश भर के होमगार्ड्स को ऐसा लगने लगा कि देश के प्रधानमंत्री उनके लिए कुछ बड़ा करने वाले हैं। लेकिन समय बीतते भाजपा सरकार पुनः केंद्र की सत्ता में आ गई और देखते ही देखते आठ साल बीत गए। लेकिन देश के प्रथम अग्निवीर माने जाते होमगार्डस आज भी उसी स्थिति में हैं।

अपने वादे को पूरा करें प्रधानमंत्री, 370 हटने के बाद UT के तहत दें तनख्वा, 365 दिन काम : कमला शर्मा

जम्मू : जम्मू-कश्मीर होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती कमला शर्मा ने प्रेस नोट जारी करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जम्मू कश्मीर होमगार्ड को रेगुलर करने के वायदे को भुला दिया है, जिसे उन्हें पूरा करना होगा। कमला शर्मा ने कहां की धारा 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर केंद्रीय शासित राज्य बन चुका है, जिस कारण UT के तहत होमगार्ड स्कोर ना केवल तनख्वाह दी जाए, बल्कि साल में 365 दिन रोजगार का वादा भी भाजपा पूरा करे।

कमला शर्मा
प्रदेश अध्यक्ष
जम्मू कश्मीर होम गार्ड वेलफेयर एसोसिएशन

अपनी मांगों को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को होमगार्ड ने पुनः लिखा खुला पत्र

वायदा खिलाफी से प्रदेश का होमगार्ड निराश : चोडिया

हिमाचल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर 24 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक रैली को संबोधित करने आ रहे हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश क्षेत्र होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन के प्रमुख नेता जोगिंदर चोडिया ने होमगार्ड्स की मांगों को याद दिलाने की एवज में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुनः खुला पत्र लिखा है। मीडिया से वार्तालाप करते हुए जोगेंद्र चौडिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का होमगार्ड भाजपा की वायदा खिलाफी से निराश है। श्री चोड़िया ने निवेदन पत्र में कहा कि आजादी से लेकर आज तक होमगार्ड सैनिक देश व प्रदेश की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा में अपना अहम योगदान निभाता आ रहा है। लेकिन देश के जनप्रतिनिधि 75 वर्षों के बाद भी 12 माह नियमित रोजगार नहीं दिलवा पाए हैं। महोदय, अब तो ऐसा लगने लगा है कि हमारा इस देश में है ही कोई नहीं । 75 वर्षों के बाद भी अपने ही देश में अपने ही लोगों के बीच, अपने ही देश के संविधान से वंचित रखा गया है। जो बात हम लोकतांत्रिक तरीके से आज तक रखते आ रहे थे, अब ऐसा लगने लगा है कि उससे हटकर अपनी बात को रखना पड़ेगा। क्योंकि हम भी देश सेवा में तैनात है, और देश सेवा देश का संविधान एक समान है। तो फिर होमगार्ड संगठन का जवान समान समानता के अधिकार से वंचित क्यों। महोदय, होमगार्ड संगठन के जवान सेना व पुलिस बल के साथ देश की आजादी से लेकर, देश की विकट परिस्थितियों, कानून व्यवस्था, चुनावों, अंतर्राष्ट्रीय मेलों व युद्ध जैसी विकट परिस्थितियों में महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ देश हित के लिए अपनी शहादते व कुर्बानियां तक दी है, जिनका खुलकर जिक्र तक नहीं हुआ, आज तक आजाद भारत में, जबकि एक राष्ट्र एक राशन कार्ड, फिर एक देश एक सैनिक संगठन, फिर नियम दो क्यों।

जोगिंदर सिंह चौड़िया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
होमगार्ड वेल्फेयर एसोसिएशन।

महोदय, संपूर्ण भारतवर्ष के होमगार्ड सैनिक बल की एक ही मांग है, 12 माह नियमित रोजगार जिसका स्वतंत्र भारत के संविधान में प्रावधान भी है। उसके बावजूद भी देशभर के होमगार्ड जवानों का भरपूर शोषण हो रहा है, इससे निजात दिलवाने की कृपा करें।

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