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विद्यालय में पिटाई से क्षुब्द यश मौर्य नें घर में फांसी लगा करी आत्महत्या, आखिर सेंट पीटर्स स्कूल को बच्चे को पीटनें का अधिकार कैसे..?

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रायबरेली। मिल एरिया थाना क्षेत्र में गुरुवार को हुई छात्र यश सिंह मौर्य की मौत के मामले में शुक्रवार को सेंट पीटर्स स्कूल में प्राचार्य और शिक्षिका से पूछताछ नहीं हो सकी। इसकी वजह स्कूल प्रबंधन ने शोक मनाया। दिनभर इसी घटना को लेकर चर्चा रही। उधर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्र की मौत हैंगिंग से होना सामने आया है।

थानेदार रेखा सिंह का कहना है कि स्कूल में छात्र की मौत की वजह से शोक था, इसलिए प्रधानाचार्य और शिक्षिका से पूछताछ नहीं हो पाई है। उधर, घर वाले छात्र के शव को बछरावां क्षेत्र के पैतृक गांव सेहगों ले गए, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।



बछरावां कोतवाली क्षेत्र के सेहगों गांव निवासी यश सिंह मौर्य, जवाहर विहार कॉलोनी में अपने चाचा राजकुमार मौर्य के घर रहकर विगत पांच साल से पढ़ाई कर रहा था। वह सेंट पीटर्स स्कूल में कक्षा सात का छात्र था। इस समय स्कूल में परीक्षाएं चल रही थी। किसी बात को लेकर स्कूल में यश की पिटाई की गई थी। इस बात से क्षुब्ध होकर यश अपने घर पहुंचकर कमरे में पंखे के हुक के सहारे फांसी लगा ली थी।

शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। इसमें मौत होने की वजह हैंगिंग आई है। मामले में घटना के दूसरे दिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पायी है। कारण छात्र की मौत के बाद स्कूल में शोक के कारण स्कूल बंद था। ऐसे में प्राचार्य व शिक्षिका से पुलिस पूछताछ नहीं कर सकी।



सीओ सदर वंदना सिंह ने बताया कि पूरे घटना की जांच कराई जा रही है। जल्द ही मामले में आरोपी प्रधानाचार्य रजनाई डिसूजा व शिक्षिका मोनिका मांगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाया जाएगा।

बिलखते हुए बोले पिता …

आईएएस बनूंगा की धुन लगाए रहता था यश, यश का पार्थिव शरीर शाम को पैतृक गांव सेहगों ले जाया गया। मां सुमित्रा देवी सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए। पिता राजीव कुमार ने बताया कि उनका बेटा यश जब छोटा था, तभी से खेल- खेल में आईएएस बनूंगा की धुन लगाए रहता था।


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यश के सपनों को साकार करने के लिए पिता और मां ने उसकी अच्छी शिक्षा- दीक्षा के लिए शहर में रह रहे उसके चाचा राजकुमार मौर्या के पास भेज दिया, ताकि उसे शिक्षा का अच्छा माहौल मिल सके। पिता ने बताया कि जब हम लोग बेटे से मिलने रायबरेली जाते या फिर बेटा छुट्टियों में घर आता था तो हर बार यही कहता था कि मैं आईएएस अधिकारी बनकर आप लोगों के अरमानों को पूरा करूंगा।

यश के पार्थिव शरीर को देखकर मां- पिता के अलावा बड़ा भाई सुयश, बहन अंतिका का रो- रो कर हाल बेहाल है। पिता ने बताया कि बेटे का गांव के खेत में अंतिम संस्कार कर दिया गया।


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