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नेशनल मेडिकल काउंसिल नें कालेज में रैंगिग के कारणों पर ध्यान रखते हुए उच्च स्तरीय कमेटी के गठन का आदेश दिया।

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नई दिल्ली! मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के कारण पढ़ाई के मामले बढ़ने पर नेशनल मेडिकल छोड़ने और स्टूडेंट्स की आत्महत्या कमीशन ( एनएमसी ) ने सख्ती दिखाई है । इन मामलों पर रोक और कॉलेजों की लापरवाही पर कार्रवाई के लिए एनएमसी में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है । अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन की अध्यक्ष डॉ . अरुणा वानिकर को एनएमसी की एंटी रैगिंग कमेटी बोर्ड का चेयरपर्सन बनाया है । 27 सितंबर कहा गया है कि हर आत्महत्या की को कमेटी की पहली बैठक हुई । इसमें मेडिकल कॉलेजों में कई आत्महत्या वजह रैगिंग नहीं हो सकती है , लेकिन और आत्महत्या जैसी प्रवृति की वजह रैगिंग होती है , इसमें कोई दो मत नहीं है । इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सोशल साइकेट्री 125 मेडिकल स्टूडेंट्स जबकि इसी ( 2010-19 ) के मुताबिक इस अवधि अवधि में 105 रेजिडेंट्स डॉक्टर्स ने आत्महत्या की । एंटी रैगिंग कमेटी ने देश में और कितने में कितने के सभी निजी और सरकारी मेडिकल लिखकर जानकारियां मांगी हैं । कमेटी ने कॉलेज के प्रिंसिपल और डीन को पत्र स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की पूछा है कि 5 वर्ष में कॉलेज स्टूडेंट्स ने बीच में पढ़ाई स्टूडेंट्स को मेडिकल कॉलेज में कितने घंटे का काम लिया नहीं या कितनी छुट्टी दी जा रही है । कमेटी और साप्ताहिक छुट्टी दी जा रही है अक्टूबर तक मेडिकल कॉलेजों से विस्तृत जानकारी मांगी है । कमेटी ने 7 अक्टूबर तक मेडिकल कॉलेज स विस्तृत जानकारी मांगी।

मुजफ्फरपुर! एसकेएमसीएच समेत सभी मेडिकल कॉलेजों में एंटी रैगिंग सेल का गठन किया जाएगा। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने इसका निर्देश प्राचार्यों को दिया है।

एनएमसी ने कहा है कि मेडिकल कॉलेजों होने वाली रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए यह कमेटी बनेगी।
कमेटी रैगिंग में दोषी पाए जाने वाले छात्रों पर सख्त कार्रवाई करेगी। एनएमसी ने कहा है कि एंटी रैगिंग के नियमों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपनी वेबसाइट पर भी जारी करे।

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इसके अलावा सभी हॉस्टल, मेस, क्लासरूम, लाइब्रेरी, लेक्चर रूम और कॉमन रूम में भी इसको लगाया जाएगा। कॉलेज के शिक्षक रैगिंग के दुष्प्रभावों के बारे में छात्रों को बताएंगे। एनएमसी ने एंटी रैगिंग सेल के बनाने के अलावा कॉलेज में पिछले पांच वर्ष में रैगिंग से तंग आकर कॉलेज छोड़ने वाले छात्रों की सूची भी मांगी है। कहा है कि रैगिंग के कारण छात्र में जान देने की भावना आ जाती है, इस पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को लगाम लगानी है।

एनएमसी ने एसकेएमसीएच समेत सभी मेडिकल कॉलेजों से पूछा है कि पिछले पांच वर्ष में किसी छात्र ने आत्महत्या तो नहीं की है। इसके अलावा मेडिकल के छात्र कितनी देर काम करते हैं और उन्हें कब साप्ताहिक अवकाश दिया जाता है। यह सभी जानकारी सात अक्टूबर तक नेशनल मेडिकल कमीशन में भेज दी जानी हैं। एसकेएमसीएच के प्राचार्य प्रो. विकास कुमार का कहना है कि कॉलेज प्रशासन मेडिकल कमीशन के निर्देशों पर अमल कर रही है।

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