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एक नैतिक बिहारी, कोल इण्डिया की व्यवस्था पर भारी नही चली साहबी तो साहब उतरे हिटलरशाही पर।

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एक बिहारी व्यवस्था पर भारी नही चली साहबी तो साहब उतरे हिटलरशाही पर, जी हां यह उपरोक्त पंक्तियां बिहारी बाबू गोविंद चौबे जी के कारण  कोल इंडिया की इकाई एस ई सी एल के हसदेव क्षेत्र में रामनगर उपक्षेत्र के झिरिया भुमिगत खान के प्रबंधन पर भारी पड़ गया। सैद्धांतिकतता, नीति नियम व नैतिकता के गुणों के धनी गोबिंद चौबे जी की कहानी उनके एक सार्वजनिक पत्र के माध्यम से समाज के समक्ष प्रस्तुत हैं। जिनके साक्ष्य गोविंद जी चौबे नें आखिरी सच टीम को दिये भी हैं, लेकिन संसाधनिक आभाव के कारण परिवार नें उनका सत्यापन करके चौबे जी को ही सुरक्षित रखनें को कहा है।

चौबे जी का सार्वजनिक खुला पत्र अक्षरशः उनकी जुबानी (आखिरी सच टीम नें साक्ष्य देखे व चौबे जी के पास ही साक्ष्य संकलित हैं।)

जय श्री महाकाल
भाईसाहब प्रणाम
मैं गोबिंद जी चौबे पिता स्वर्गीय राम व्यास चौबे बक्सर बिहार से हूं और पौराधार कालोनी में आवास संख्या बी/26 में सपरिवार रहता हूं, जो मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में आता है।

5-8-2000 को कोल इंडिया की इकाई एस ई सी एल के हसदेव क्षेत्र में रामनगर उपक्षेत्र के झिरिया भुमिगत खान में टेक्निकल ग्रेड सी में माइनिंग सरदार के पद पर अपनी सेवा प्रारंभ किया ।

2010 में टेक्निकल ग्रेड बी में ओभरमैन के पद पर पदोन्नति हुई।

5-8-2000से लेकर 19-5-18 तक मैं पुरी निष्ठा और ईमानदारी से कम्पनी तथा राष्ट्र की सेवा किया।जिसका प्रमाण है कि मुझे अनुसासन हीनता के नाम पर एक चेतावनी पत्र तक विभाग ने 19-5-18 तक नहीं दिया।

2017 में मैं सार्वजनिक जीवन में आया मुझे झिरिया माइंस के माइनिंग स्टाफ एसोसिएशन का अध्यक्ष बनाया गया। उस समय झिरिया माइन मैनेजर द्वारा अनेक प्रकार से भ्रष्टाचार कर कंपनी और राष्ट्रीय संपत्ति का दोहन निजी हित में किया जा रहा था। अनेक प्रकार से घोटाले किए जा रहे थे, ऐसे में मैं अपनी नैतिक जिम्मेदारी और देश हित को ध्यान में रखकर संगठन के पैड पर घोटालों का जिक्र कर मैनेजर से भ्रष्टाचार की जानकारी मांग लिया। जो मेरे जीवन का परिवार सहित अभिशाप बन गया। साजिश और षड्यंत्र की शुरुआत वहीं से शुरू हो गई। सबसे पहले माइनिंग क्षेत्र में सक्रिय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को उच्च अधिकारियों द्वारा विश्वास में लेकर मुझे मेरे पद से पदमुक्त किया गया। अब मैं जीवन में आने वाले तूफान से बेखबर हो फिर से निष्ठावान बन कम्पनी की सेवा में लग गया।
साजिश को अंजाम देने का काम 13-5-18 दिन रविवार को किया गया जब मैं और मेरा सहकर्मी दोनों छुट्टी से लौटने के बाद डिउ्टी एलाऊ के लिए मैनेजर के पास गए। पहले मैं गया तो मुझे मैनेजर द्वारा यह कहकर एलाऊ किया गया कि कल दिनांक 14-5-18 से डिउ्टी करें डायरेक्ट रविवार नहीं देंगे,वहीं मेरा सहकर्मी जब गया तो उसे डिउ्टी दे दिए,जिसकी जानकारी मुझे 19-5-18 को हुई, क्योंकि वो दूसरे पाली में कार्यरत था।

यही बात जब मैनेजर से मैंने 20-5-18 को पुछा कि साहब आप मुझे 13-5-18 को डिउ्टी नहीं दिये और टी एन सिंह जो मेरा सहकर्मी है उसे दे दिये, मैं आपका क्या बिगाड़ा हूं। इतना पुछते ही पूर्व प्रायोजित साजिश के कारण मैनेजर भड़क गए और ऊंची आवाज में बोले कि मैं यहां मालिक और मैनेजर हूं, जिसे मेरा मन करेगा उसे रविवार, ओभर टाइम, पीएचडी और डिउ्टी दूंगा, तुम पूछने वाले कौन हो?

मैंने कहा कि आप यहां के मैनेजर हैं, मालिक नहीं और मैं स्वतंत्र भारत का नागरिक हूं। यदि आप मेरे साथ अन्याय करेंगे तो मैं आपसे पूछूंगा क्योंकि यह मेरा संबैधानिक अधिकार है। उसके बाद वे और भड़क गए, सैकड़ों लोगों के बीच बोलें कि मिस्टर तुम्हें मैनेजर के पावर का ज्ञान नहीं है तुम्हें बर्बाद कर के मार डालूंगा। मैं हतप्रभ सा हो गया और यह कहकर कि मैनेजर का कितना पावर होता है मैं देखूंगा, अपनी हाजिरी आउट कराकर घर चला आया, तथा इसका लिखित शिकायत मैनेजर से उच्च अधिकारी उपक्षेत्रीय प्रबंधक को दिया। मेरे घर आने के बाद आठ अधिकारी मैनेजर कार्यालय में दरवाजा बंद कर 5 घंटे मीटिंग किए तथा मैनेजर से मेरे खिलाफ उच्च अधिकारी उपक्षेत्रीय प्रबंधक के पास लिखित शिकायत करवाये।

मेरी शिकायत पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, तथा मैनेजर के शिकायत पर निम्न कारवाई की गई जो इस प्रकार है।

1- उपक्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा मैनेजर के शिकायत पत्र पर प्राथमिक जांच करके रिपोर्ट देने का आदेश कल्याण अधिकारी को दिया गया, पर अपने आदेश का अवहेलना कर उसी दिन बिना प्राथमिक जांच कराए और कारण बताए दो बार जान से मारने के प्रयास करने के साथ कम्पनी के स्टैंडिंग आर्डर के अनेक गंभीर आरोप 5 धाराओं में लगाकर 72 घंटे में जबाब देने आदेश देकर मुझे निलंबित कर दिया गया। बाहर लोगों में मैसेज पास आउट कर दिया कि अब मैं डिसमिस हो जाउंगा, इस घटनाक्रम से पुरा परिवार सदमें में आ गया।

2- सेवानिवृत्त करने के लिए मेरे नाम का फाइल बना कर एस ई सी एल हेड आफिस बिलासपुर भेजा गया संयोग बस समरी डिसमिस का कानून रद्द होने के कारण तत्काल डिसमिस से बच गया।

3- आरोप पत्र का जवाब देने के चार पांच दिन बाद उपक्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा डिउ्टी एलाऊ पत्र दिया गया और पुनः अपने आदेश का अवहेलना कर डिउ्टी ज्वाइन करने से पहले क्षेत्रीय कार्यालय से निलंबन में ही मेरा स्थानांतरण कर दिया गया।

4- मैं स्थानांतरण वाले जगह पर ज्वॉइन नहीं किया क्योंकि मेरे पास इकाई में ज्वाइनिंग पत्र था। ये इन लोगों का मुझे मेरे गवाहों से दूर करने का प्रयास था।

5- उपक्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच कमेटी गठित की गई। जांच अधिकारी द्वारा जांच प्रारंभ 6-8-18 से की गई जो 8-8-18 को सम्पन्न हुई।

6– जांच में जांच अधिकारी द्वारा प्रबंधन को 30 सितम्बर तक लगभग 50 दिन का समय और मुझे मात्र 1से 8 अगस्त तक आठ दिन का समय दिया गया।

7- जांच में दोनों तरफ से 8- 8 गवाह गवाही दिये।

8– प्रबंधन के सारे गवाहों ने मेरे बारे में यह गवाही दिया की घटना दिनांक से पहले मेरा किसी से कोई विवाद नहीं हुआ है, और सुरक्षा तथा उत्पादन में सर्वश्रेष्ठ भूमिका रहता है। घटना के बारे में प्रबंधन के गवाहों के बयान में काफी विरोधाभास है जो पढ़ने से स्पष्ट हो जाता है कि पुरा बयान काल्पनिक और बनावटी है। प्रबंधन ने मेरे खिलाफ गवाहों के बयान के अलावा कोई भी कागजात या ठोस प्रमाण जांच में नहीं दिया।

9- मैंने जांच अधिकारी के नाम से स्वेक्षा से लिखित 50 गवाहों का स्वहस्ताक्षरित पत्र,13-5-18 को मेरे को डिउ्टी न देना और सहकर्मी को देना का प्रमाण के साथ भ्रष्टाचार के विरूद्ध कार्यवाही की मांग गई पत्र सहित 14 पृष्ठ का कागजात जांच अधिकारी को दिया जिसके चलते साजिश रची गई थी।

10- जांच अधिकारी क्षेत्रीय महाप्रबंधक के दबाव में अपने नैतिक मूल्यों का गला घोंट करके और सब कुछ नजरअंदाज करके एक तरफा प्रबंधन के पक्ष में फैसला दिए क्योंकि वे भी प्रबंधन के अंग थे। सारे आरोपों का मुझे दोषी ठहराकर जांच समाप्त किए।

11- जांच अधिकारी एक सप्ताह जांच प्रतिवेदन अपने पास रखने के बाद 15-8-18 को अग्रिम कार्रवाई हेतू उपक्षेत्रीय प्रबंधक जांच प्रतिवेदन को दिए।

12- उपक्षेत्रीय प्रबंधक 3-10-18 तक जांच फाइल को अपने पास रखे और 4-10-18 को पूर्व में की गई स्थानांतरण को निरस्त कर झिरिया माइन के रोल में रखकर के रामनगर उपक्षेत्र के बंद पड़ी मलगा माइन में बिना कोई सजा किये डिउ्टी एलाऊ किए।

13- जब कोई सजा नहीं दिए तो एक माह का वेतन लेने के बाद मैं महाप्रबंधक हसदेव को पत्र दिया कि मेरे निलंबन अवधि का वेतन निर्गत किया जाए, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और करोड़ों की भ्रष्टाचार की जांच किया जाए।

14- फिर तीन माह बाद जनवरी 2019 में सजा के तौर पर मेरे दो वेतन वृद्धि पर रोक लगाने का पत्र दिए और एक बार फिर अपने आदेश का अवहेलना कर तत्काल पहले से लगी दो वेतन वृद्धि को काटवा दिए, जिसमें 2017 की भी वेतन वृद्धि शामिल है जबकि घटना 2018 का है।

15- मैने लिखित में इन सारी बातों का जिक्र करके एस ई सी एल चेयरमैन के पास री- जांच के लिए अपील किया, वहां से भी हर बात को नजरंदाज कर अपील निरस्त कर दिया गया।

16- मलगा माइन में मुझे प्रताड़ित करने करने के लिए द्वितीय पाली में डिउ्टी दिया गया और मेरे जुनियर को जनरल पाली में रखा गया।

17- मेरे पास केवल इमानदारी थी जिसके बल पर इन अत्याचारियों से लड़ रहा था, उसे भी ये कमिने लोग बिना काम कराये वेतन देकर कुचलना शुरू कर दिया क्योंकि मुझे कोई काम नहीं दिया गया।

परिवार के भरण-पोषण हेतु नित्य अपने जमीर और इमानदारी को घुंट घुंटकर मरते देख विना काम किए वेतन लेते रहा। विना काम के वेतन लेना हर पल मुझे मार रहा था।

18- जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो इसका लिखित शिकायत एक बार फिर अगस्त 2019 में चेयरमैन विलासपुर को किया कि विना काम लिए वेतन देकर कंपनी का लाखों का नुक़सान क्यों किया जा रहा है, क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है, करने वाले पर कार्रवाई करें

19- जिसके सापेक्ष कारवाई मेरे ऊपर किया गया, एक बार फिर से मेरा स्थानांतरण दूसरे बंद माइन में कर दिया गया। जब मैंने पूछा कि बंद माइन से बंद माइन में स्थानांतरण का क्या उद्देश्य है तो कोई जवाब नहीं दिया गया।

20- कोई रास्ता नहीं सूझा तो मैं सितंबर में उपक्षेत्रीय प्रबंधक को लिखित सूचना देकर उनके कार्यालय के सामने शांति से धरना पर बैठ गया।

21- एक माह तक बैठा रहा इस बीच दो तीन बार अधिकारी मिलने आए जरूर पर किसी ने कोई हल नहीं निकला। दुर्गा पूजा जैसा त्योहार दो किलोमीटर की दूरी पर गुजर गया, परिवार तड़पता रहा पर इन राक्षसों का विचार नहीं बदला। दिपावली आने वाला था और ये सभी उदासीन थे।

22- अक्टूबर में मैंने आत्मदाह की सूचना दिया। उसके बाद प्रशासन ने मुझे उठा लिया। फिर अथक प्रयास के बाद पुनः स्थानांतरण निरस्त कर 19 दिसंबर को मलगा माइन में डिउ्टी जनरल पाली में दी गई।

23- चार माह बाद कोरोना काल में जहां एम्प्लायर अपने कर्मचारियों को बिना काम वेतन देते थे वहां मेरा बिना कोई सूचना के रविवार और पीएचडी की हाजिरी काटा जाने लगा,जिसका शिकायत मैं लिखित में उपक्षेत्रीय प्रबंथक को किया पर वो कोई कार्रवाई नहीं किए।

24- हद तो तब हो गई जब अक्टूबर- नवंबर के मेरे वेतन पर्ची में सारी संबैधानिक दायित्वों का अतिक्रमण कर के कल्याण अधिकारी द्वारा मेरा पांच रविवार, दो पीएचडी, के साथ पांच दिन का हाजिरी खाता में काटकर लगभग 40 हजार रुपए का नुक़सान कर कोल इंडिया के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया गया।

25- क्योंकि कोल इंडिया के इतिहास में आज तक कहीं और किसी माइन में कल्याण अधिकारी द्वारा माइनिंग विभाग के कर्मचारी की हाजिरी नहीं काटी गई है। कारण कि माइनिंग विभाग का नियंत्रण अधिकारी मैनेजर होता है न कि कल्याण अधिकारी।
26- मलगा माइन में भी ये लोग देश की अरबों रुपए की संपत्ति नाशकर भ्रष्टाचार किए हैं जैसे-
– दो साल की प्रोपर्टी रहते माइन बंद कर दिए।
– करोड़ों रुपए की इंफ्रास्ट्रक्चर को चोरों के हवाले कर दिए।
-करोडो रूपए की वन संपदा को आग के हवाले कर दिए।
– इंफ्रास्ट्रक्चर की रखवाली के नाम पर दो साल तक आठ दस कर्मचारी को लाखों रुपए वेतन देकर कंपनी का नुक़सान करना।

27- मलगा माइन का जब सिर्फ अवशेष मात्र बचा तो 10 जनवरी 2021को मुझे झिरिया माइन में स्थानांतरित किए और अब मैं जनवरी से इस माइन में आया हूं जहां से अपनी सेवा शुरूआत की थी। अति ये है कि यहां भी मुझे काम नहीं दिया जा रहा है।

28- झिरिया माइन में मुझ से जूनियर को पदोन्नति देकर पुनः मेरा एक इंक्रीमेंट पर रोक लगाये है। इस तरह से तीन इंक्रीमेंट और अन्य अतिरिक्त भत्ते को काटकर मेरा वेतन आधा कर दिया गया है।

29- इन सारी भ्रष्टाचार और अत्याचार की जानकारी मै लिखित में प्रधानमंत्री और कोयला मंत्री कार्यालय के साथ विभाग के हर विभागाध्यक्षों,सीबीआई, विजिलेंस,लेबर कमिश्नर, जिलाधिकारी सहित पुलिस अधीक्षक को किया।

31- पीएम पोर्टल पर चार आनलाइन शिकायत के साथ, ईमेल और ट्विटर के माध्यम से भी जानकारी दिया। दुर्भाग्यवश कहीं से आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

32- कोयला मंत्री तो फेश बुक मैसेंजर पर मेरे द्वारा दी गई सारी जानकारी से अवगत भी है पर मौन साधना में समाधीन है, शायद भारी अटैची आड़े आ रहा है, वरना देश भक्ति का दंभ भरने वाले मोदी सरकार में
33- 2019 में जबलपुर उच्च न्यायालय में पिटिशन भी दाखिल किया हूं पर आज तक कोई नोटिस,पेशी की जानकारी मुझे नहीं हुई, जब भी अपने अधिवक्ता से बात करता हूं। कोई न कोई बहाना बना कर भरमा दे रहे हैं। समझ न आता क्या करूं?

34- मेरा परिवार आर्थिक, समाजिक और मानसिक शोषण अनवरत आज तक जो इन। अधिकारियों व देश के कर्णाधारों के द्वारा जारी है। जीने की इच्छा न होते हुए भी परिवार और बच्चों का मुंह देख मर- मर कर जीना पड़ रहा है। विभाग जीने नहीं देता और प्रशासन मरने नहीं देता।
चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा है पर भोलेनाथ पर पुर्ण विश्वास है कि उनके यहां देर होता है, अंधेरे नहीं… और सत्य परेशान हो सकता है… पर पराजित नहीं। इसी को आधार बनाकर बेईमान बनकर जी रहा हूं।

अपनी पीड़ा का वर्णन नहीं कर सकता पर इतना जरूर कहता हूं कि ब्राह्मण हूं और जनेऊ का कसम खाया हूं कि चाहे जान भी देना पड़े तो दूंगा लेकिन सच सामने ला कर रहूंगा। किसी न किसी को भोलेनाथ जरूर मेरे लिए रखें होंगे।
जितनी जानकारी उपर दिया हूं सबका प्रमाण मेरे पास मौजूद हैं। कुछ महत्वपूर्ण कागजात भेज रहा हूं, पढ़कर मार्ग दर्शन करें । बहुत ही अल्प समय से सोशल मीडिया के बदौलत परिचय है पर इंसान का इंसान से इंसानियत का रिश्ता सदियों से हैं
शेष आगे——
सादर🙏🏼
#हर_हर_महादेव_जय_शिव_शम्भू🙏🏼

उपरोक्त पत्रक के एक एक शब्द गोविंद जी चौबे के हैं आखिरीई सच परिवार नें लगाये गये अभियोगों के सापेक्ष चौबे जी द्वारा प्रदत्त तथ्यों को देखा है व देखकर तथ्यों के सापेक्ष पत्र होनें पर पत्र को प्रसारित किया है।


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