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प्रवासी मजदूर सोबरन महतो की गूजरात से घर आते हुऐ, ट्रेन से गिरनें से संदेहास्पद मौत।

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हजारीबाग/ कैमूर/ बिष्णुगढ़। जैसे ही शुक्रवार सुबह को सोबरन महतो का शव बिहार के कैमूर से बिष्णुगढ के सिरैय पंचायत के सरैयाटांड पहुंचा तो परिजनो के हृदय विदारक चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। मृतक की पत्नी का रोते-रोते बुरा हाल हो चुका था। वे लगातार अचेत हो जा रही थी। जिनको आस- पास के महिलाओं द्वारा संभाला जा रहा था, लेकिन अपने पति को खोने का गम में वह किसी की नही सुन रही थी।

उनके एक शब्द सभी को रुला दे रहे थे कि हम केकरा सहारे रहबय। उसकी पत्नी यह कह कर दहाड़ मार रही हैं कि मुझे क्या मालूम कि मेरे पति मुझे ठुकरा कर जिंदगी के उस दहलीज पर ले जाकर खड़ा कर देंगे। विधवा पत्नी की बिलाप सुन कर उपस्थित लोग भी अपने- अपने आंसू को नही रोक पाए। वहीं सोबरन महतो का शव जैसे ही उनके घर पहुंचा तो “क्या बूढ़े, क्या नौजवान एकाएक सब उसके घर के तरफ दौड़ पड़े।



मृतक सोबरन महतो के 16 वर्षीय पुत्र सुनील कुमार एवं 14 वर्षीय पुत्री लक्ष्मी कुमारी अपने मृत पिता के शव को निहार- निहार बिलख रहे थे और उनकी आंखों के आँसू भी सुख गये थे। बताते चले कि बिष्णुगढ थाना क्षेत्र अंतर्गत सिरैय पंचायत के सरैयाटांड निवासी सरयू महतो के 38 वर्षीय पुत्र सोबरन महतो की गुजरात से घर लौटते के क्रम में गुरुवार को चलती ट्रेन से गिरकर बिहार के कैमूर जिले के कर्मनाशा रेलवे स्टेशन से सटे पश्चिम खजुरा के समीप मौत हो गयी थी।

ट्रेन से गिरने के कारणो के बारे में कुछ भी पता नही चल पायी हैं। इस दुखद घटना को लेकर प्रवासी हित में कार्य करनेवाले सिकन्दर अली ने कहा कि हमारे झारखंड के हजारीबाग, गिरीडीह, बोकारो जिले के अधिकतर लोग पलायन कर चुके हैं। और अधिकतर मजदूर विदेशों में काम करते हैं और प्रवासी मजदूरों की मौते लगातार हो रही हैं

जो एक बडी चिंता का विषय हैं। इसलिए मैं झारखंड सरकार से आग्रह करना चाहूँगा कि मृतक परिवारों को सरकार की ओर से उचित सहयोग राशि दी जाय।


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