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जनपद मिर्जापुर की पड़री पुलिस, एक चोरी व दो मारपीट के मुकदमें आजतक नही हुए पंजीकृत, जबकि अटैची उद्योग जिम्मेदारों द्वारा जोरों पर, रोजाना थाना करता है लाखों की अवैध वसूली।

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मिरजापुर। जनपद के थाना क्षेत्र पड़री में अनियमितताओं का आलम यह है कि माह अक्टूबर में चोरी की शिकायत आज तक पुलिस द्वारा नही दर्ज की गयी, वही उसी पीड़ित के ऊपर पुनः उसकी दुकान पर हमला किया जाता है, व तोड़फोड़ की जाती है जिसकी शिकायत लेकर पीड़ित थाने जाता है लेकिन उक्त मारपीट के क्रम में आज एक माह बुरी तरीके से बीत जाने के बाद भी केवल एनसीआर पंजीकृत कर मामले की इतिश्री कर ली गई। हम आपको दिखायेंगे पड़री थानाध्यक्ष व उनके अधीनस्थों की उपेक्षा का शिकार हुए दो पीड़ितों की तीन शिकायतें लेकिन जिम्मेदार आजतक नही कर पाये मात्र मुकदमा ही दर्ज जांच व दोषियों पर कार्यवाही की बात करना तो फर्जी बकवास ही करना ही होगा।



जबकि इसी थाना क्षेत्र में माह जनवरी की 1 तारीख को एक बर्तन व्यापारी परितोष तिवारी जोकि जिला मुख्यालय के मूल निवासी हैं। अपनी पत्नी वह बेटी को लेकर कार से ससुराल जा रहे थे। जिस के क्रम में तिवारी के साथ रास्ते में गाड़ी निकालने के लिए विवाद होने पर उनकी गाड़ी से तोड़फोड़ कर पत्नी व उनके साथ लोगों द्वारा मारपीट की जाती है उक्त मुद्दे की भी शिकायत आज तक पड़री थाना दर्ज नहीं कर पाया है।

जबकि उक्त तीनों मुद्दों पर जब थाना के जिम्मेदार थानाध्यक्ष को उनके सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया तो उनका नंबर पूरा दिन नेटवर्क एरिया से बाहर रहा। आज प्रातः जब 10:00 बज कर 5 मिनट पर थानाध्यक्ष महोदय के सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया तो नवागंतुक प्रभारी निरीक्षक द्वारा पंचायत थाना अध्यक्ष के रूप में कार्य करना बताया गया। तथा थानाध्यक्ष महोदय के अवकाश पर होने की बात बताई गई। जब समाचार में वर्णित शिकायतों के क्रम में जानकारी की अपेक्षा की गई महोदय ने बाहर होने की बात कही व शाम तक जानकारी उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया।


परितोष तिवारी द्वारा दी गयी मारपीट की शिकायत कार्यवाही शून्य, आखिर क्यों नही लिखी गया शिकायत का मुकदमा।


इसी के क्रम में जब माननीय पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पुलिस अधीक्षक का मोबाइल उठाया ही नहीं गया। जबकि हमारे प्रतिनिधि ने उनको दो बार फोन किया। अब जाने वाली बात यह है कि क्या यह सीयूजी नंबर जोकि माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय जी को जनता के टैक्स के पैसे द्वारा उपलब्ध करवाए गए हैं। आखिर उन पर आने वाली काल को उनके द्वारा क्यों रिसीव नहीं किया जाता है। रही बात यदि काल आने के समय महोदय व्यस्त थे, तो क्या उन्होंने वापस काल उन नंबरों पर किया जिनसे उन्हें फोन किया गया था। खैर हमारे प्रतिनिधि का कोई फोन एसपी साहब की सीयूजी नंबर या उनके किसी अधीनस्थ के द्वारा नहीं किया गया मतलब क्या माना जाए उक्त नंबर मिश्रा जी की पैतृक संपत्ति है उसे वह जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करें।


12.10.2022 को रामदुलारे की दुकान में चोरी की शिकायत कार्यवाही शून्य। चोर दे रहे साहबानों को हिस्सा।


जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी यह कहते नहीं थकते हैं, कि किसी भी मीडिया प्रतिनिधि का फोन जरूर उठाया जाए वह उनकी बातों का सार्थक जवाब दिया जाए। लेकिन शायद मुख्यमंत्री जी की बात इन जिम्मेदारों तक नहीं पहुंच रही है। या फिर यह उस पर अमल नहीं कर पा रहे हैं। हम आपको बताते चलें की पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर श्री मिश्रा जी का पुराना इतिहास ही सफेदपोशों के इर्द गिर्द घूमता नजर आया है। ऐसा हम नहीं उनकी तैनाती के पूर्व जनपद गोंडा में उनके कार्यकाल के दौरान हुई घटनाएं कहती हैं।

वही रास्ता आज मिर्जापुर में भी मिश्रा जी ने तैयार कर लिया है, सबसे हास्यास्पद बात यह है, कि उनके इस रास्ते को बेहतर तरीके से समर्थन उनके उच्च अधिकारियों द्वारा मिल रहा है। वहीं अधीनस्थ भी उनकी लय में लय मिलाकर वसूली का अवैध कारोबार लगातार संचालित किए हुए हैं। शायद उस वसूली का हिस्सा अधीनस्थ मिश्रा जी तक पहुंच जते हैं वह मिश्रा जी उसमें से अपने उच्च अधिकारियों का भी हिस्सा बराबर पहुंचाते है।


रामदुलारे पाल की दुकान में तोड़फोड़ व मारपीट की शिकायत कार्यवाही मात्र एनसीआर दर्ज।


इसी क्रम में जब हमारे प्रतिनिधि द्वारा डीआईजी मिर्जापुर से संपर्क किया गया तो फोन उनके पीआरओ द्वारा फोन उठाया गया वही जबकि यह जानकारी चाही गई की महोदय थानाध्यक्ष पड़री का सीयूजी नंबर कवरेज एरिया से बाहर है, क्या कोई दूसरा व्यक्तिगत नंबर थाना से संपर्क के लिए मिल सकता है, जिसपर उन्होंने जानकारी होने से असमर्थता जाहिर करते हुए शीघ्र ही अपडेट करने की बात कही। जबकि हमारी टीम के पड़ताल में यह निकल कर आया है कि उक्त थानाक्षेत्र में वसूली उद्योग बहुत तेजी से जारी है। जबकि थाना क्षेत्र में घटनाएं तो बहुत होती हैं लेकिन उनका पंजीकरण जमीन पर हुई घटनाओं के सापेक्ष बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है। व जांच के नाम पर अवैध वसूली का उपक्रम नियोजित किया जाता है। जांच के नाम पर वसूली में चढ़ावा चढ़ जानें पर अपराधियों को सुरक्षित व मुकदमा विहीन कर उज्जवल चरित्र निर्माण का जिम्मा पड़री थाना बेहतर तरीके से निर्वाहित कर रहा है।



अब हम आपको पड़री थानाक्षेत्र में विगत वर्ष की उपलब्धियों का भी विवरण दिखाते हैं, विगत वर्ष 2022 में थानाक्षेत्र में कुल मिलाकर 185 शिकायतें पंजीकृत हुई हैं। उनमें भी लगभग 75% शिकायतें विभाग के स्थानीय जिम्मेदारों द्वारा पंजीकृत की गई हैं। जबकि उन 50% दर्ज शिकायतों का यदि वास्तविक मूल्यांकन कर दिया जाए उसमें भी 50% शिकायतें विद्वेष पूर्ण होंगी, जिंहें थानाध्यक्ष, य क्षेत्रीय निरीक्षक द्वारा अपने किसी आका को संतुष्ट करने के लिए दर्ज की गई हैं। जबकि हम आपको तीन शिकायतें इस समाचार में दिखा रहे हैं। जिनका आज तक कोई भी पंजीकरण व जांच नहीं हुई है। वही निरीक्षक गण फर्जी धारा 60 के मुकदमे बनाने में व्यस्त हैं, तो थानाध्यक्ष अटैची उद्योग में व्यस्त हैं।


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