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कौशाम्बी चिरनिंद्रा में सो रहा प्रशासन दो नामधारी ओझा, दो नमो के तीन अलग अलग काम , जइसे चाहे ओझा वइसेन सही बा, पढ़ें आलेख खिसक जाएगी पैरों तले से जमीन।

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कौशाम्बी। जनपद के नेवादा विकास खंड की ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान शिवशंकर ओझा व कौशलेन्द्र प्रताप ओझा एक ऐसी सख्शियत जिनके तीलस्मि तिकड़ी ऐसी कि स्थानीय निकाय से लेकर प्रादेशिक व राष्ट्रीय निकायों व शासन प्रसासन विधि व्यवस्था को लगातार धाता बताकर लाभ तो अर्जित कर ही रहें हैं। वही गॉव के संभ्रान्त लोगों के निजी जीवन के साथ ही सामाजिक गरिमा को भी निजी उद्देश्य की प्रतिपूर्ती के लिए येन केन प्रकारेंय साम दाम दंड भेद पूर्वक अपने हितार्थ उपयोग करता है। जिसके कारण काफी ग्रामवसियों की स्वतंत्रता व निजता का भी लगातार हनन हो रहा है। लेकिन शाशन प्रसासन लगातार चिर निंद्रा में सो रहा है।

अलग अलग सन में अलग अलग निर्वाचन कार्ड, निर्वाचन पहचान पत्र की कहानी सरकारी दसवेजों की जुबानी

वहीं एक और रहस्यदघाटन जो हम पूर्व में प्रकाशित भी कर चुके हैं कि शिवशंकर ओझा व कौशलेन्द्र प्रताप ओझा के दोनों नामों से निर्वाचन आयोग दो पहचान पत्र भी निर्गत कर चुका है जिसका एक नायब उपयोग शिवशकर ओझा व कौशलेन्द्र प्रताप ओझा नें निकला इनकी तीन पुत्रीयों के पिता का नाम शिवशंकर ओझा है तो दो बेटों के पिता का नाम कौशलेन्द्र प्रताप ओझा है, इसका नियोजन करने के पीछे का कारण यह है कि दो बच्चो से अधिक वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पढ़िए हमारी पुरानी रिपोर्ट….

पूर्व प्रधान शिवशंकर ओझा का तिलिस्मी संसार व्यवस्था को धाता बताकर दो नामों से देता रहा व्यवस्था को दग़ा, जिलाधिकारी कौशाम्बी स्वत: लें संज्ञान तब बचेगी निर्दोषों की जान।

एक नाम शिवशंकर ओझा से रहे प्रधान तो एक नाम कौशलेन्द्र प्रताप ओझा से हैं अध्यापक

शिवशंकर ओझा पुत्र सौखी लाल ओझा पूर्व ग्राम प्रधान बैरामद करारी जिनके प्रधानी के कार्यकाल में अपने परिजनों के नाम पट्टा करके सरकारी जमीन हथिया ली गयी थी जो आज उक्त महिला लाभार्थी जो कि ईश्वर को प्यारी हो गयी है लेकिन उक्त जमीन पर माननीय जी का कब्जा बदस्तूर जारी है। वही इनकी प्रधानी में अपने प्रिय लोगों व विशेष राजनैतिक सहयोगियों को सरकारी लाभ लेन देन करके किया गया।

कौशलेन्द्र ओझा एक अध्यापक 

शैक्षिक अभिलेखों व पहचान पत्र के आधार पर किसान जूनियर हाईस्कूल बिगहरा उस्मानपुर, नेवादा कौशाम्बी (उ0प्र0 शासन द्वारा सहायता प्राप्त) में धन व राजनैतिक प्रभाव के बल पर चयन समिति व प्रबन्ध समिति को खुश करके कौशलेन्द्र प्रताप ओझा नें सहायक अध्यापक का पद प्राप्त कर लिया।

तब से आज तक उ०प्र० शासन के राजकोष से अनवरत सहायक अध्यापक का वेतन आहरित करते हुए उ०प्र० सरकार को राजकोषित क्षति पहुँचानें और पूर्व में शिवशंकर ओझा के नाम से प्रधान पद के रूप में रहते हुए इनके द्वारा सरकार से निर्धारित वेतन व अनुमन्य लाभ भी प्राप्त करते रहे।

शिवशंकर ओझा के नाम से पंजीकृत है हथियार

शिवशंकर ओझा पुत्र सौखिलाल ओझा उर्फ़ परशुराम ओझा के नाम से एक असलहा पंजीकरण संख्या 9916 व गन संख्या 65207 पंजीकृत है आज जबकि वोटर सूची में उक्त नाम पंजीकृत नहीं है तो इस असलहे का सत्यापन किस प्रकार चल रहा है।

अलग अलग बैंक खातों का रहा अलग अलग उपयोग 

बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा बेनीराम कटरा में उपरोक्त व्यक्ति व तथाकथित व्यक्ति के एक ही बैंक में दो अलग- अलग नामों से खाते संचालित रहे है। प्रथम नाम शिवशंकर ओझा पुत्र सौखी लाल ओझा के नाम पर खाता सं0-22500100009407 तथा द्वितीय नाम कौशलेन्द्र प्रताप ओझा के नाम से 22500100001206 के नाम पर खाता संचालित रहे है।

तीसरे खाते का सच व उसका विशेष उपयोग 

वहीं किसान जूनियर हाईस्कूल की सहायक अध्यापक की वेतन खाता सं0 05670100026922 पर बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा सरायअकिल में प्राप्त कर रहे है। इस प्रकार शिवशंकर ओझा पुत्र सौखी लाल ओझा निवासी उपरोक्त शैक्षिक अभिलेखों में कूटरचना व फर्जी ढंग से नाम बदल कर शासन राजकोष से वेतन आहरित करना आपराधिक एवं दण्डनीय कृत्य है जिसकी जांच सक्षम अधिकारियों द्वारा चिर निंद्रा में सोना कितना जायज है।

एसी एसटी एक्ट का मुकदमा है दर्ज पर आज तक नहीं हो सकी गिरफ्तारी

माह मई 2023 को गॉव की ही महिला व बेटी को पूर्व प्रधान व वर्तमान अध्यापक जी नें मारा पीटा उनकी पकड़ व धमक का असर यह रहा कि उक्त पीड़िता को महीनों चक्कर काटने के बाद एफाईआर तो पंजीकृत हो गयी लेकिन आगे की कार्यवाही शून्य कारण प्रधान व जिले के आलाधिकारियों की आँखें ओझा के नाम के बोझे से इतना दब जाती हैं कि उनको कुछ भी दिखाई पड़ना बंद हो जाता है, जिसका परिणाम है कि उक्त महिला को मुकदमा वापस लिए जाने का दबाव व न लेने पर खामियाजा भुगतने को तैयार रहो की धमकी भी कई बार मिल चुकी है।

विद्यालय के छात्र पंजीकरण रजिस्टर से गायब है शिवशंकर ओझा के छात्र पंजीकरण प्रपत्र

शिवशंकर ओझा जिस विद्यालय में अध्ययन की शुरुआत किये उसकी इनके घर की दूरी में मात्र एक दीवाल का फैसला है। जिसके छात्र पंजीकरण रजिस्टर से शिवशंकर ओझा के नामाँकन का प्रमाण पत्र आज की तारीख में विद्यालय के उक्त रजिस्टर से नियोजित शाजिस के तहत फाड़ लिया गया कारण विद्यालय की चाभी उक्त समय पर इनके घर पर ही रहती थी।

बैरामद करारी की जनता है परेशान

इस गॉव की दशा यह है कि इस इकलौते ओझा ने गांव के अपने समस्त विरोधियो को परेशान करके रखा है ओझा के कार्यकाल से आज तक गांव में हुए हर केस की जांच करवाई जाय जिसमे इनके किसी भी प्रकार के विरोधी पर यदि मुकदमा पंजीकृत हुआ है य उसका उत्पीड़न हुआ है तो उसके प्रमुख नियोजक कौशलेन्द्र ओझा छद्म शिवशंकर ओझा ही रहे हैं।

वर्तमान प्रधान पर हत्या के प्रयास का मुकदमा ओझा व उनके सजातीय विरोधी का नियोजित षड्यंत्र

हाल में ही वर्तमान ग्राम प्रधान उनके परिजनों पर फर्जी मुकदमा 307 का लगाया गया जिसके प्रमुख अभियुक्त बाहर हैं लेकिन ओझा के प्रतिद्वंन्दी सियाराम परिवारिक लोगों के साथ अंदर हैं जबकि मानसिंह हत्या के प्रयास केस की गुत्थी शिवशंकर ओझा व उक्त विषयक मुकदमा लिखवाने वाले के इर्द गिर्द घूम रही है।


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