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पुलिस ने कारण बताए बिना ही शङ्कराचार्य महाराज को ज्ञानवापी जाने से रोका

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वाराणसी। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में ज्ञानवापी में मूल विश्वनाथ मन्दिर के प्रमाण मिल जाने के बाद उस स्थान की परिक्रमा करने जा रहे परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘1008’ को पुलिस ने जबरन रोक दिया। शङ्कराचार्य महाराज सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शङ्कराचार्य घाट स्थित श्रीविद्या मठ से ज्ञानवापी जाना चाहते थे लेकिन पूरे मठ को ही पुलिस के जवानों ने घेर लिया।

ज्ञानवापी की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के यूपी पुलिस एक्शन में।

सरकार द्वारा लगातार सनातन धर्म के सर्वोपरि शंकराचार्य के साथ लगातार दुर्व्यव्हार की यह घटना सरकारी हिंदुत्व के एजेंडे की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं इससे ज्यादा दुर्दिन और क्या देखने को मिलेंगे की सत्ता चला रही धर्मचार्यों को जबकि इतिहास साक्षी हैं की धर्मचार्यों ने सत्ता को निर्देशित किया हैं कभी धर्मचार्यों को निर्देशित करने वाली सत्ता की अक्षुणता बरकरार नहीं रही हैं।

ज्ञातव्य है कि 27 जनवरी को काशी पधारे पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज ने मूल विश्वनाथ के परिक्रमा की इच्छा प्रकट की थी।आज सुबह से ही प्रशासन ने भारी पुलिसकर्मियों की घेराबंदी कर और अवरोध लगाकर श्रीविद्यामठ को चारों तरफ से घेर लिया था। अपने संकल्प के अनुसार सोमवार को जब पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज श्रीविद्यामठ से मूल विश्वनाथ जाने के लिए तैयार हुए तो प्रशासन ने महिला पुलिसकर्मियों को आगे कर महाराज जी का रास्ता रोक दिया। जिस पर मठ में मौजूद मातृशक्तियों ने महिला पुलिसकर्मियों से काफी प्रतिवाद किया। मठ के पूर्वी द्वार पर ही पुलिस के अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें रोक दिया कि आप ज्ञानवापी नहीं जा सकते। ज्ञानवापी की परिक्रमा करने की किसी नई परम्परा की शुरुआत नहीं होने दी जाएगी। इस पर महाराजश्री ने कहा कि ज्ञानवापी की परिक्रमा उनके द्वारा पहली बार नहीं की जा रही है। पूर्व में भी मैं ज्ञानवापी जाता रहा हूँ। यही नहीं हमारे पूर्वज भी समय- समय पर ज्ञानवापी की परिक्रमा करते रहे हैं। इसके कई प्रमाण भी हमारे पास हैं।

पूज्यपाद महाराज जी ने वहाँ उपस्थित प्रशासन के प्रतिनिधि एसीपी भेलूपुर एवं दशाश्वमेध से पूछा हमें क्यों रोका जा रहा है जब हम नियम के अन्तर्गत मूल विश्वनाथ की परिक्रमा करना चाह रहे हैं? इसका जबाब देते हुए एसीपी भेलूपुर ने कहा कि महाराज जी ऊपर से आदेश है आपको परिक्रमा करने की अनुमति नही है। शङ्कराचार्य महाराज के पूछने पर कि अनुमति क्यों नही है तो एसीपी भेलूपुर ने कहा कि बस आपको अनुमति नहीं है इसलिए हम आपको हम विन्रमतापूर्वक जाने नही देंगे। शङ्कराचार्य महाराज ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यदि आप धारा 144 के कारण मुझे वहाँ जाने से रोक रहे हैं तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि सिर्फ हम दो लोग ही ज्ञानवापी जाएंगे। ऐसा करने पर न तो कानून का उल्लंघन होगा और न ही कानून व्यवस्था को किसी प्रकार का खतरा होगा। मैं स्वयं पुलिस और प्रशासन का सहयोग करना चाहता हूँ। बावजूद इसके पुलिस अधिकारी यह कहते रहे कि जहाँ आप परिक्रमा करना चाहते हैं वह प्रतिबन्धित क्षेत्र है। आपको वहाँ जाने की अनुमति नहीं है।

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इसके उपरान्त शङ्कराचार्य महाराज की ओर से ज्ञानवापी की परिक्रमा करने की अनुमति पत्र अधिकारियों को भेजा गया। जबकि इससे पूर्व शङ्कराचार्य कार्यालय की ओर से प्रोटोकोल का पत्र पुलिस-प्रशासन को पत्र भेजकर अवगत कराया गया था कि 29 जनवरी को अपराह्न साढ़े तीन बजे वह ज्ञानवापी स्थित मूल विश्वनाथ मन्दिर की परिक्रमा करने जाएंगे। शङ्कराचार्य कार्यालय की ओर से पत्र मिलने के बाद 28 जनवरी को ही पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी श्रीविद्या मठ पहुँचे थे। शङ्कराचार्य महाराज से बातचीत में उन्होंने वहाँ धारा 144 लागू होने की बात कही थी। उस वक्त भी शङ्कराचार्य महाराज ने यह प्रस्ताव दिया था कि यदि ऐसी बात है तो मैं अपने एक शिष्य के साथ ही परिक्रम कर लूंगा। तब भी अधिकारी कुछ भी स्पष्ट किए बिना ही मठ से लौट गए थे।

ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ने कहा कि एएसआई के रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि ज्ञानवापी स्थित प्रांगण में मूल विश्वनाथ विराजे हैं। हम सनातनधर्मियों के सर्वोच्च प्रतिनिधि होने के नाते और स्वयं सनातनधर्मी होने के नाते मूल विश्वनाथ मन्दिर की परिक्रमा कर उनको प्रणाम करना चाहते हैं। हम यह परिक्रमा प्रतिबन्धित क्षेत्र के बाहर से ही करना चाहते हैं। जहाँ से आमजन का आवागमन हो रहा है। हम सनातनधर्मियों के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं। प्रशासन धारा 144 का हवाला देकर हमको रोक रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोग प्रतिदिन वहाँ पर नमाज पढ़ रहे हैं उनके लिए धारा 144 नहीं है और हम कानून का पालन करते हुए केवल दो लोगों के साथ अपने आराध्य मूल विश्वनाथ की परिक्रमा करना चाह रहे हैं तो हमें अनुमति नहीं दी जा रही है। सौ करोड़ सनातनधर्मियों का इससे बड़ा और क्या अपमान होगा? डेढ़ वर्ष से मुकदमा चल रहा है और इस दौरान मूल विश्वनाथ को पूजा, राग-भोग से वंचित कर दिया गया है। जबकि यही स्थित अयोध्या में थी।

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